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अगर 200 डॉलर पहुंचा कच्चा तेल, तो भारत में क्या होगा पेट्रोल का दाम? आंकड़े देख उड़ जाएगी आपकी नींद!

ईरान का होर्मुज स्ट्रेट रूट दुनिया के लिए बेहद अहम रास्ता है. यहां से ग्लोबल तेल कारोबार का करीब 20 फीसदी यानी रोज लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है. लेकिन ईरान इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो गई है ऐसे में अगर कच्चा तेल 200 डॉलर के पार गया तो भारत में पेट्रोल कितने का मिलेगा?

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Crude Oil

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक डरावना सवाल बार-बार उठ रहा है अगर इजरायल-ईरान युद्ध या किसी बड़े वैश्विक संकट की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $200 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, तो क्या होगा? मौजूदा समय में कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंच गया है लेकिन $200 का स्तर एक ऐसी आर्थिक सुनामी ला सकता है जिसकी कल्पना मात्र से आम आदमी की नींद उड़ सकती है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, यह स्थिति किसी भी बड़े आर्थिक संकट से कम नहीं होगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि कच्चे तेल की कीमतें अगर 200 डॉलर के पार गईं तो भारत में पेट्रोल कितने का मिलेगा?

कितनी हो जाएगी पेट्रोल की कीमत?

कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल के दाम के बीच के गणित को समझें, तो आमतौर पर माना जाता है कि कच्चे तेल में हर $1 की बढ़त घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमत को 50 से 60 पैसे तक बढ़ा देती है। अगर आज कच्चा तेल $100 के आसपास है और पेट्रोल ₹100 के करीब मिल रहा है, तो $200 होने का मतलब है कि कच्चे तेल की बेस प्राइस में ही ₹50 से ₹60 का सीधा उछाल आ जाएगा। जब इस बढ़ी हुई कीमत पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्यों का वैट (VAT) और डीलर का कमीशन जुड़ेगा, तो पेट्रोल की कीमत आसानी से ₹170 से ₹200 प्रति लीटर के स्तर को छू सकती है।

सब चीजें होंगी महंगी

इस भारी उछाल का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। भारत की पूरी अर्थव्यवस्था 'ट्रांसपोर्टेशन' पर टिकी है। डीजल की कीमतों में ऐसी ही बढ़त का मतलब है कि फल, सब्जियां, दूध और अनाज जैसी बुनियादी चीजों की ढुलाई का खर्च दोगुना हो जाएगा। इससे देश में हाइपर-इन्फ्लेशन (अत्यधिक महंगाई) की स्थिति पैदा हो सकती है। आम आदमी की बचत खत्म होने लगेगी और लोगों का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा। हवाई सफर से लेकर ऑनलाइन सामान मंगाने तक, सब कुछ आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकता है।

सरकार के लिए भी यह एक धर्मसंकट की स्थिति होगी। अगर सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए टैक्स कम करती है, तो सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा, जिससे विकास कार्य और कल्याणकारी योजनाएं रुक सकती हैं। वहीं अगर सरकार टैक्स कम नहीं करती, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर सकता है। $200 बैरल कच्चे तेल का मतलब होगा कि भारत का 'विदेशी मुद्रा भंडार' (Foreign Exchange Reserve) तेजी से खत्म होने लगेगा, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर सकता है।

मंदी कर डर

विशेषज्ञों का कहना है कि $200 का स्तर केवल एक नंबर नहीं, बल्कि वैश्विक मंदी का अलार्म है। ऐसी स्थिति में दुनिया भर की इंडस्ट्रीज बंद होने की कगार पर पहुँच सकती हैं और बेरोजगारी बढ़ सकती है। हालांकि, भारत सरकार ने हाल के वर्षों में 'एनर्जी सिक्योरिटी' पर काफी काम किया है और रूस जैसे देशों से सस्ते तेल के विकल्प तलाशे हैं, लेकिन $200 के स्तर पर पहुँचने के बाद कोई भी डिस्काउंट या वैकल्पिक रास्ता पूरी तरह राहत नहीं दे पाएगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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