IEC 2025: मनसुख मंडाविया ने कहा- मोदी सरकार युवा और श्रम शक्ति के दम पर विकसित भारत बनाएगी
- Authored by: आलोक कुमार
- Updated Dec 18, 2025, 11:19 AM IST
आजादी से पहले बने 26 कानून से देश का श्रम मार्केट चल रहा था। यानी 100 साल पहले से बने काननू देश की आजादी से 75 साल तक चलते रहे थे। इसे बदलकर नया लेबर कोड लाया गया है। भारत में 4 नए लेबर कोड से महिलाओं से लेकर युवाओं को समान अवसर मिलेगा। नए लेबर कोड अपॉइंटमेंट लेटर की कानूनी गारंटी देता है।
मनसुख मंडाविया
केंद्रीय युवा मामले, खेल और श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (IEC) 2025 में आज 2047 तक विकसित भारत बनने का रोड मैप जारी किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवा शक्ति और श्रम शक्ति को आगे बढ़ा रही है। देश के लिए ये दोनों शक्ति जरूरी है। इसी के दम पर हम 2047 तक विकसित भारत बनाएंगे। उन्होंने कहा कि लेबर फोर्स एक महत्वपूर्ण पीलर है। देशभर में 40 करोड़ से अधिक लेबर काम करते हैं। इसलिए मोदी सरकार श्रम और श्रमिकों को प्राथमिकता देती है। आजादी से पहले बने 26 कानून से देश का श्रम मार्केट चल रहा था। यानी 100 साल पहले से बने काननू देश की आजादी से 75 साल तक चलते रहे थे। इसे बदलकर नया लेबर कोड लाया गया है। भारत में 4 नए लेबर कोड से महिलाओं से लेकर युवाओं को समान अवसर मिलेगा। नए लेबर कोड अपॉइंटमेंट लेटर की कानूनी गारंटी देता है।
क्या इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा?
मंडाविया ने कहा कि नए लेबर कोड से इंस्पेक्टर राज नहीं बढ़ेगा। कोई भी मालिक या इंस्पेक्टर किसी से भी जबरदस्ती काम नहीं करा पाएगा। इसके साथ ही 40 से अधिक उम्र के सभी श्रमिक को यह नया लेबर कोड साल में एक बार फ्री में हेल्थ चेकअप की सुविधा मुहैया कराएगा। नए लेबर कोर्ड में हेल्थ चेकअप की सुविधा और आयुष्मान योजना के जरिये मुफ्त में इलाज की सुविधा मिलेगी। यह नया लेबर कोड गिग वकर्स को सोशल सिक्योरिटी मुहैया कराएगा।
1 साल काम करने पर गेच्युटी दी जाएगी
नए कानून में हपने ठेके पर काम करने पर 1 साल तक काम करने वाले को गेच्युटी देने का प्रावधान किया है।
नए कानून में क्या नौकरी से निकालना आसान हुआ?
केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस सवाल का जवाब दिया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। नए लेबर कानून में हमने श्रमिकों के हित में ध्यान रखकर काम किया है। पहले जहां एक उद्योग में 100 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना सरकार की अनुमति के निकालना संभव नहीं था, वहीं अब इस संख्या को बढ़ाकर 300 कर दिया गया है। इसके पीछे की वजह यह है कि बहुत सारी कंपनियों में 100 से अधिक श्रमिक काम करते थे लेकिन वो उसे बताते ही नहीं थे। इससे श्रमिकों को भारी नुकसान होता था। अब ऐसा नहीं होगा। और हम नौकरी देने की बात करते हैं, निकालने की नहीं। इसलिए यह भ्रम फैलाया जा रहा है। हम सभी पर नजर रखते हैं।
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