ICICI बैंक ग्लोबल मार्केट्स ने हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौद्रिक नीति दर (Monetary Policy Rate) को आगे बढ़ाने की संभावनाएं अब बहुत कम हैं। इसका मुख्य कारण कोर महंगाई दर का शांत रहना है। इस स्थिति में बैंक का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रोविजनल दरें 2026‑27 में भी लंबे समय तक स्थिर बनी रहेंगी। रिपोर्ट कहती है कि कोर महंगाई दर में कोई बड़ा उछाल नहीं दिख रहा है और इसी वजह से मौद्रिक नीति समिति (MPC) के लिए दरों को बढ़ाना संभव नहीं लगता। साथ ही हाल ही में तेल (crude oil) की कीमतों में वृद्धि ने भी दरों को स्थिर रखने के पक्ष में माहौल बनाया है।
कोर महंगाई दर शांत, बढ़ोतरी की उम्मीद कम
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ICICI बैंक ग्लोबल मार्केट्स के विश्लेषण के अनुसार नए सीपीआई (CPI) सीरीज में कोर महंगाई दर अपेक्षा से कम रही। महंगाई दर के इस शांत व्यवहार के कारण ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बहुत कम दिखती है। बैंक का मानना है कि अगर कोर महंगाई दर स्थिर रहती है, तो आरबीआई को मौद्रिक नीति दर को बढ़ाने की जरुरत नहीं पड़ सकती। इसके अलावा, तेल की कीमतों में हाल की वृद्धि ने भी महंगाई दर को ऊपर नहीं बढ़ने दिया। तेल की महंगाई बढ़ने से आमतौर पर मूल्य स्तर पर दबाव आता है, लेकिन ICICI बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दबाव इतनी तेजी से नहीं आया कि MPC को दरें बढ़ानी पड़ें।
नीति समिति की बैठक: वृद्धि की ओर सकारात्मक संकेत
6 फरवरी 2026 को आयोजित आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स से पता चला कि अधिकांश सदस्य ग्रोथ को लेकर अधिक आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं। नीति समिति ने कहा कि कई हाई फ्रीक्वेंसी संकेतकों (High Frequency Indicators) जैसे उत्पादन, निर्यात‑आयात डेटा, उपभोक्ता गतिविधियां ने सुधार का संकेत दिया है। इसके अलावा, भारत और यूएस तथा यूरोपीय संघ (EU) के बीच जो व्यापार समझौते हुए हैं, उससे भी आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मकता बढ़ी है। यही वजह है कि MPC ने अगले वित्तीय वर्ष (H1‑2026‑27) के लिए विकास दर में 20 बेसिस प्वाइंट ऊपर संशोधन किया है। आसान शब्दों में कहें तो, मंदी की बजाय विकास की संभावनाएं मजबूत दिख रही हैं और नीति निर्माता इसे ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रहे हैं।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में संशोधन, फूड महंगाई में बढ़त
MPC के मिनट्स में यह भी बताया था कि नए सीपीआई सीरीज में खाद्य वस्तुओं की महंगाई में ऊपर की ओर झुकाव देखने को मिला है। हालांकि कोर महंगाई दर अपेक्षित स्तर से कम रहने के कारण कुल मिलाकर महंगाई दर पर दबाव सीमित रहा है। इसके बावजूद, जनवरी‑फरवरी की रिपोर्ट में देखा गया कि कुछ खाद्य समूह की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन यह तेजी इतनी महत्वपूर्ण नहीं थी कि महंगाई दर दर को लक्ष्य से ऊपर ले जाए।
MPC की सोच: विकास है सशक्त, मुद्रास्फीति नियंत्रित
MPC के अधिकांश सदस्य इस बात पर सहमत थे कि महंगाई दर की संभावनाएं अधिक चिंताजनक नहीं हैं, भले ही CPI के अनुमान को ऊपर दिशा में कुछ संशोधन मिला हो। इस संशोधन का मुख्य कारण कीमती धातुओं जैसे गोल्ड‑चांदी की कीमतों में वृद्धि रहा है। लेकिन यह वृद्धि आम तौर पर ग्राहक मूल्य स्तर को इतना प्रभावित नहीं कर पाई कि MPC को दरों में बदलाव करना पड़े।
ब्याज दरें रुक सकती हैं लेकिन दर में कटौती की उम्मीद कम
ICICI बैंक की रिपोर्ट का कहना है कि आरबीआई के निर्णय के बाद ऐसा लगता है कि भविष्य में दरों में और कटौती की संभावना भी कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि विकास मजबूत दिख रहा है तथा महंगाई दर नियंत्रण में है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरबीआई अब लंबे समय तक दर स्थिर का रुख अपना सकता है। इसका मतलब यह है कि नीति दर उस स्तर पर बनी रह सकती है जहां वह है (5.25%), ताकि ब्याज दरों के प्रभाव को अर्थव्यवस्था में सही ढंग से पहुंचाया जा सके। विशेष रूप से रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि दिसंबर 2025 के दर कटौती के बाद से सरकार बॉन्ड यील्ड और विन्डल डिपॉजिट रेट्स ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं। इस स्थिति से मौद्रिक प्रभाव कमजोर हो सकता है, जिसे सुधारने पर MPC का ध्यान रहेगा।
आरबीआई ने दरें स्थिर रखीं
6 फरवरी 2026 को MPC ने पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा और न्यूट्रल नीति स्टैन्स को जारी रखा। इसका मतलब यह है कि महंगाई दर और विकास दोनों को संतुलित करने के लिए कोई जल्दी निर्णय नहीं लिया जाएगा। निष्कर्ष यह निकलता है कि ब्याज दर वृद्धि की संभावना अब कम है। कोर महंगाई दर शांत है। विकास के संकेत बेहतर हैं। आरबीआई संभवतः लंबे समय तक दर स्थिर रख सकता है। महंगाई दर लक्ष्य के करीब कंट्रोल में है।
