घर खरीदना हर कपल का सपना होता है। कई बार पति-पत्नी मिलकर जॉइंट लोन लेकर यह सपना पूरा करते हैं। लेकिन कभी-कभार रिश्तों में खटास इस कदर बढ़ जाती है कि पति-पत्नी का साथ रह पाना मुमकिन नहीं रह जाता है। तब उनके सामने तलाक ही एक रास्ता बचता है। लेकिन कई बार घर का सपना पूरा करने के लिए दोनों जॉइंट लोन पर घर ले लेते हैं। ऐसे में अगर दोनों ने मिलकर घर लिया है तो इसके बंटवारे को लेकर उलझन पैदा होती है। ऐसे में आइए जानते हैं अगर पति-पत्नी ने जॉइंट लोन पर घर लिया है तो तलाक के बाद EMI कौन भरेगा?
कैसे होगा घर का बंटवारा?
सच तो यह है कि तलाक के समय प्रॉपर्टी के बंटवारे का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में अक्सर महिलाओं को नुकसान उठाना पड़ता है। लिहाजा, उनके लिए कुछ चीजों को जानना बेहद जरूरी है। आइए, यहां देखते हैं कि किन स्थितियों में पत्नी अपने पति से हिस्सा ले सकती है और किन में ऐसा करने की इजाजत नहीं है। अगर बाद में दोनों के बीच तलाक हो जाए, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है अब इस लोन की EMI कौन भरेगा?
जॉइंट लोन में दोनों की जिम्मेदारी बराबर
जब पति-पत्नी मिलकर जॉइंट होम लोन लेते हैं, तो दोनों को-बॉरोअर (Co-borrower) कहलाते हैं। इसका मतलब है कि बैंक दोनों को बराबर जिम्मेदार मानता है। यानी लोन की EMI चुकाने की जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि दोनों पर बराबर होती है।
तलाक के बाद क्या होता है?
तलाक हो जाने के बाद भी बैंक के लिए स्थिति नहीं बदलती। बैंक को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो गया है या नहीं उसके लिए दोनों अब भी को-बॉरोअर हैं। अगर कोई एक EMI भरना बंद कर देता है, तो बैंक बाकी राशि दूसरे से वसूल सकता है।
प्रॉपर्टी पर हक किसका होगा?
अगर घर दोनों के नाम पर है, तो दोनों का बराबर हक रहता है, भले ही एक व्यक्ति EMI भर रहा हो। ऐसे में कोर्ट या आपसी समझौते से तय करना होता है कि प्रॉपर्टी किसके हिस्से में जाएगी। अगर एक पक्ष पूरा लोन चुका देता है, तो वह दूसरे से पैसे की भरपाई मांग सकता है इसके लिए कोर्ट में केस भी किया जा सकता है।
क्या लोन ट्रांसफर हो सकता है?
हां, अगर दोनों पक्ष तैयार हों, तो बैंक एक व्यक्ति के नाम से दूसरे के नाम पर लोन ट्रांसफर कर सकता है। लेकिन इसके लिए बैंक की मंजूरी जरूरी होती है और नए बॉरोअर की क्रेडिट हिस्ट्री, इनकम और दस्तावेज की जांच भी की जाती है।
अगर पति ने भरा लोन और नाम पत्नी का है तो किसे मिलेगा घर?
अगर पति ने लोन लिया है लेकिन घर का टाइटल पत्नी के नाम पर है, तो कानून के मुताबिक प्रॉपर्टी का मालिकाना हक पत्नी का माना जाएगा, क्योंकि घर उसके नाम पर रजिस्टर्ड है। हालांकि, अगर पति यह साबित कर देता है कि उसने ही लोन की रकम चुकाई है या EMI भर रहा है, तो वह उस प्रॉपर्टी में अपने हिस्से का दावा कर सकता है। वहीं, अगर पत्नी ने घर की खरीद में कोई आर्थिक योगदान नहीं दिया है, तो वह उसमें हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकती, भले ही घर उसके नाम पर क्यों न हो। ऐसी स्थिति में पत्नी चाहें तो लोन को अपने नाम ट्रांसफर करवा सकती हैं और घर की पूरी मालिक बन सकती हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें पति के साथ सेटलमेंट करना होगा और तय राशि का भुगतान करना पड़ेगा। कुल मिलाकर, तलाक के बाद जॉइंट लोन वाले घर पर हक इस बात पर निर्भर करता है कि किसने वास्तव में भुगतान किया और कानूनी दस्तावेज किसके नाम पर हैं।
