1 अप्रैल के बाद जैसे ही लोगों ने अपनी सैलरी स्लिप देखी, सबके मन में एक ही सवाल उठा "सैलरी कम क्यों हो गई?" अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो परेशान न हों। आपकी कुल कमाई कम नहीं हुई है, बल्कि उसका बंटवारा बदल गया है। पहले जो पैसा आपके हाथ में (इन-हैंड) आता था, अब उसका एक बड़ा हिस्सा सीधे आपकी बचत (PF) के रूप में जमा हो रहा है। यही नए वेज कोड (Wage Code) का असली उद्देश्य है।
नए लेबर कोड के तहत '50% बेसिक सैलरी' का नियम और नए टैक्स स्लैब लागू होने के कारण आपकी इन-हैंड सैलरी में यह बदलाव आया है। इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए अपनी मार्च और अप्रैल की सैलरी स्लिप की तुलना करें। इसमें विशेष रूप से अपनी बेसिक सैलरी, पीएफ (PF) योगदान और ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) को ध्यान से देखें। अगर आपको भी नए वेज कोड के हिसाब से अपनी सैलरी कैलकुलेट करनी है तो आइए आपको बताते हैं आप कैसे खुद से कैलकुलेट कर सकते हैं.
क्या कहता है नया वेज कोड?
नए नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी का 'बेसिक वेतन' (Basic Salary) उसकी कुल सैलरी (Cost to Company - CTC) का कम से कम 50% होना चाहिए। अभी तक कई कंपनियां बेसिक वेतन को बहुत कम रखती थीं और अन्य भत्तों (Allowances) को बढ़ाकर कुल सैलरी दिखाती थीं। अब चूंकि पीएफ का योगदान बेसिक वेतन पर ही निर्भर करता है, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ने का मतलब है पीएफ में आपका योगदान बढ़ जाना।
इन-हैंड सैलरी में क्यों आएगी कमी?
मान लीजिए आपकी CTC ₹50,000 है। पहले अगर आपका बेसिक वेतन ₹20,000 था, तो उस पर पीएफ कटता था। लेकिन नए वेज कोड के बाद आपका बेसिक वेतन बढ़कर कम से कम ₹25,000 (50%) हो जाएगा। जब बेसिक वेतन बढ़ेगा, तो पीएफ और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाली रकम भी स्वतः ही बढ़ जाएगी। इसका परिणाम यह होगा कि आपकी 'इन-हैंड' सैलरी यानी जो पैसा हर महीने आपके बैंक खाते में आता है वह कम हो जाएगी। सरल शब्दों में, सरकार आपको 'आज' कम खर्च करने के लिए प्रेरित कर रही है ताकि आपका 'कल' यानी रिटायरमेंट सुरक्षित हो सके।
रिटायरमेंट फंड पर असर
शुरुआत में इन-हैंड सैलरी का कम होना आपको झटका लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपके लिए एक बड़े फायदे का सौदा है। आपका पीएफ योगदान बढ़ने का मतलब है कि आपके रिटायरमेंट खाते में हर महीने ज्यादा पैसा जमा होगा। इस पैसे पर कंपाउंड इंटरेस्ट (Compound Interest) मिलेगा। आप जितना अधिक पीएफ में योगदान देंगे, रिटायरमेंट के समय आपको उतनी ही बड़ी रकम एकमुश्त (Lumpsum) मिलेगी। यह न केवल भविष्य की आर्थिक सुरक्षा है, बल्कि यह एक प्रकार की जबरन बचत (Forced Savings) भी है।
ऐसे करें खुद कैलकुलेशन
- पुराना स्ट्रक्चर: अपनी वर्तमान बेसिक सैलरी देखें और उसका 12% पीएफ के रूप में निकालें।
- नया स्ट्रक्चर: अपनी कुल सैलरी का 50% बेसिक मानें और उस पर 12% पीएफ कैलकुलेट करें।
- अंतर निकालें: दोनों के बीच का अंतर ही आपकी 'इन-हैंड सैलरी' में होने वाली मासिक कमी है।
- भविष्य का आकलन: इस बढ़े हुए पीएफ योगदान को आने वाले 20-25 सालों के चक्रवृद्धि ब्याज (लगभग 8%) से जोड़कर देखें। आपको दिखेगा कि जो पैसा आज कम मिल रहा है, वह भविष्य में लाखों रुपये के बड़े फंड के रूप में तब्दील हो जाएगा।
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