ईरान और इजराइल के बीच चल रहा सैन्य तनाव अब सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। ईरान न केवल एक सैन्य शक्ति है, बल्कि वह कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा भंडार रखता है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास लगभग 209 बिलियन बैरल का सिद्ध कच्चा तेल भंडार मौजूद है। यह विशाल मात्रा वैश्विक तेल बाजार में ईरान की अहमियत को रेखांकित करती है। जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ रहा है, दुनिया की नजरें 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर टिकी हैं वह संकरा समुद्री रास्ता जो ईरान और ओमान के बीच है। यदि ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की अपनी धमकी को अमली जामा पहनाया, तो दुनिया भर में तेल की भयानक किल्लत (Supply Shock) पैदा हो सकती है।
ईरान का तेल भंडार
ईरान दुनिया के सबसे प्रमुख तेल उत्पादकों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसके 209 बिलियन बैरल के सिद्ध भंडार हैं, जो दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग 12% हिस्सा है। सालों से पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय निवेश की कमी का सामना कर रहा है, फिर भी ईरान रोज 3.3 से 3.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन कर रहा है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 3% है। यह उत्पादन ईरान को OPEC (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बनाता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऑयल लाइफलाइन
ईरान के पास तेल भंडार से भी ज्यादा घातक हथियार 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर उसका नियंत्रण है। यह संकरा जलमार्ग तेल उद्योग के लिए 'लाइफलाइन' है। डेटा के अनुसार, दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20% (लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अगर यह जलमार्ग बंद होता है, तो सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देशों की आपूर्ति बाधित हो जाएगी, जिससे बाजार में तेल की भारी कमी हो जाएगी।
सप्लाई बाधित होने का भयंकर असर
अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अवरुद्ध करता है या वहां तनाव के कारण शिपिंग रुकती है, तो वैश्विक तेल कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आएगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि तेल की कीमतें रातों-रात दोगुनी होकर $120-$150 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकती हैं। इससे केवल तेल ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि दुनिया की कुल LNG खपत का 20% भी इसी रास्ते से गुजरता है। इससे न केवल परिवहन महंगा होगा, बल्कि बिजली उत्पादन और औद्योगिक उत्पादन लागत में भी भारी वृद्धि होगी।
भारत के लिए खतरा
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। भारत के कुल तेल आयात का लगभग 50% हिस्सा इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते पश्चिमी एशिया से आता है। किसी भी तरह की रुकावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी हो सकती है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जो सीधे तौर पर महंगाई (Inflation) को बढ़ाएगा और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालेगा।
