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कितनी है आपकी नेटवर्थ, ऐसे करते हैं कैलकुलेट

आपके फाइनेंशियल हालातों की असली तस्वीर आपकी नेटवर्थ (Net Worth) दिखाती है, यानी आपकी कुल संपत्ति में से कर्ज घटाने के बाद बची राशि। अंबानी अडानी से लेकर देश दुनिया के दिग्गज कारोबारियों और रईसों की नेटवर्थ तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप अपनी नेटवर्थ जानते हैं? अगर आप भी अपनी नेटवर्थ जानना चाहते हैं तो आइए आपको बताते हैं आप कैसे अपनी नेटवर्थ कैलकुलेट कर सकते हैं?

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Networth calculation

अंबानी अडानी से लेकर देश दुनिया के दिग्गज कारोबारियों और रईसों की नेटवर्थ तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप अपनी नेटवर्थ जानते हैं? अगर नहीं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। दरअसल, आज के समय में अपनी फाइनेंशियल हेल्थ का सही आंकलन करने के लिए सिर्फ इनकम या सेविंग्स की जानकारी काफी नहीं है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि आपकी नेटवर्थ (Net Worth) कितनी है। यही असली आंकड़ा है जो दिखाता है कि आप आर्थिक रूप से कितने मजबूत हैं।

भारत में म्यूचुअल फंड निवेश ₹50 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है और 10 करोड़ से ज्यादा एक्टिव रिटेल निवेशक हैं, ऐसे में अपनी नेटवर्थ जानना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। नेटवर्थ आपकी कुल संपत्ति में से कुल कर्ज घटाने के बाद बची रकम होती है। आसान शब्दों में कहें तो अगर आप आज अपने सारे लोन चुका दें, तो जो पैसा बचेगा, वही आपकी असली दौलत है। आइए आपको बताते हैं आपकी एक्चुअल नेटवर्थ कितनी है और आप इसे कैसे कैलकुलेट कर सकते हैं?

नेटवर्थ क्या है?

सबसे पहले समझ लेते हैं नेटवर्थ क्या है? नेटवर्थ (Net Worth) किसी व्यक्ति की कुल संपत्ति होती है, जिसमें से उसके सभी कर्ज और देनदारियां घटा दी जाती हैं। सरल शब्दों में कहें तो, नेटवर्थ यह बताती है कि अगर आप आज अपने सभी कर्ज चुका दें, तो आपके पास असली दौलत कितनी बची है। आपकी संपत्ति में बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर, घर, कार, गोल्ड जैसी चीजें शामिल होती हैं, जबकि देनदारियों में होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया और अन्य कर्ज आते हैं।

कैसे निकालते हैं नेटवर्थ?

नेटवर्थ निकालना आसान है, बस इसके लिए अपनी वित्तीय जानकारी साफ-साफ दर्ज करनी होगी। सबसे पहले अपनी संपत्तियों (Assets) की लिस्ट बनाएं। इसमें आप बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर, गोल्ड, घर या कार जैसी सभी चीजें शामिल करें। मान लीजिए अगरआपके पास बैंक में ₹50,000 हैं, फिक्स्ड डिपॉजिट ₹2 लाख, शेयर ₹1 लाख, घर ₹50 लाख, कार ₹5 लाख और जेवरात ₹2 लाख हैं, तो आपकी नेटवर्थ ₹60.5 लाख होगी।

इसके बाद अपनी देयताएं (Liabilities) जोड़ें। देखें कि आप पर कितना कर्ज है, जैसे होम लोन ₹30 लाख, कार लोन ₹3 लाख और क्रेडिट कार्ड बकाया ₹50,000। कुल देनदारियां ₹33.5 लाख हुईं। अब फॉर्मूला लगाएं: नेटवर्थ = कुल संपत्ति – कुल देनदारियां = ₹60.5 लाख – ₹33.5 लाख = ₹27 लाख। यानी आपकी असली नेटवर्थ ₹27 लाख है।

क्यों जरुरी है नेटवर्थ जानना?

नेटवर्थ जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह आपकी फाइनेंशियल प्रोग्रेस का माप देता है। अगर आपकी नेटवर्थ हर साल बढ़ रही है, तो इसका मतलब है कि आपकी सेविंग और निवेश सही दिशा में जा रहे हैं। इसके अलावा, संकट से निपटने की ताकत भी नेटवर्थ से पता चलती है। पॉजिटिव नेटवर्थ यह दिखाती है कि आप इमरजेंसी जैसे मेडिकल खर्च या नौकरी छूटने की स्थिति में भी संभल सकते हैं।

नेटवर्थ रिटायरमेंट प्लानिंग में भी मदद करती है। अगर आप 60 की उम्र तक ₹1-2 करोड़ की नेटवर्थ बना लेते हैं, तो आप हर महीने ₹20,000 जैसी पेंशन निकाल सकते हैं (4% रूल के हिसाब से)। इसके अलावा, लोन अप्रूवल में भी आपकी नेटवर्थ अहम भूमिका निभाती है। बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन आपकी नेटवर्थ देखकर तय करते हैं कि आपको कितना लोन दिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, ₹50 लाख की नेटवर्थ वाला व्यक्ति आसानी से ₹25 लाख का होम लोन पा सकता है।

हर 6 महीने पर करें ये काम

अपनी नेटवर्थ को ट्रैक करना भी जरूरी है। हर 6 महीने में अपनी नेटवर्थ अपडेट करें क्योंकि शेयर मार्केट, गोल्ड और प्रॉपर्टी के दाम बदलते रहते हैं। पुराने आंकड़े मायने नहीं रखते। आप एक्सेल शीट या ऐप्स का इस्तेमाल करके अपनी नेटवर्थ ट्रैक कर सकते हैं। इससे आपको पता चलेगा कि आप वित्तीय रूप से कहां खड़े हैं और आगे की योजना कैसे बनानी है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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