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भारत के लोगों के पास कितना सोना है? PM Modi ने क्यों की ना खरीदने की अपील?

PM Modi Gold: मीडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील की है। ऐसे में यह भी जानना जरूरी है कि भारत के लोगों के पास कितना सोना है?

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भारत के लोगों के पास कितना सोना है? PM Modi ने क्यों की ना खरीदने की अपील?

मीडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जिम्मेदारी के साथ खर्च करने की अपील की है। पीएम मोदी ने लोगों से अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने को कहा है। इसके अलावा उन्होंने अनावश्यक खर्च कम करने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम को अपनाने की भी सलाह दी है। माना जा रहा है कि सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और आयात खर्च को नियंत्रित करने के लिए यह संदेश दे रही है।

सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है भारत

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है। भारतीय परिवारों में सोना सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि निवेश और सामाजिक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक माना जाता है। शादी-विवाह, त्योहार और पारंपरिक अवसरों पर सोना खरीदना देश की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि हर साल भारत में भारी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है।

करीब 34,600 टन सोना

मार्गन स्टैनल और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लोगों के पास करीब 34,600 टन सोना जमा है। यह दुनिया के सभी केंद्रीय बैंकों (जैसे US Federal Reserve) के सोने के भंडार से भी कहीं अधिक है। यह दुनिया के कुल सोने के भंडार का करीब 11% से 13% हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में परिवार सोने को सुरक्षित बचत के रूप में रखते हैं।

भारतीयों के पास मौजूद सोने की कीमत

पिछले एक साल में सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के चलते भारतीय परिवारों के पास मौजूद गोल्ड की कुल वैल्यू करीब 5 ट्रिलियन डॉलर (5000 अरब डॉलर) तक पहुंच गई है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 450 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है। खास बात यह है कि घरों में जमा सोने की यह कुल संपत्ति अब भारत की कुल जीडीपी, जो करीब 4.1 ट्रिलियन डॉलर है, उससे भी अधिक हो चुकी है। वहीं, सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए निवेशकों का रुझान गोल्ड ईटीएफ की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है असर

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब वैश्विक तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तब सोने का आयात देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डालता है। सरकार की चिंता यह भी है कि अगर लोग बड़े पैमाने पर सोना खरीदते रहे, तो व्यापार घाटा बढ़ सकता है।

इसी कारण पीएम मोदी ने लोगों से फिलहाल गैर-जरूरी खरीदारी टालने और देशहित में संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि देशवासियों को ऊर्जा बचत और जिम्मेदार उपभोग की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।

कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील

प्रधानमंत्री ने कंपनियों से भी कहा है कि वे कोविड काल की तरह जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को बढ़ावा दें। उनका मानना है कि इससे ईंधन की बचत होगी और आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। अगर वैश्विक हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं, तो आने वाले महीनों में सरकार और भी कई बचत आधारित कदम उठा सकती है।

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