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पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया, देश में कितने दिन का बचा है पेट्रोल-डीजल और LPG का स्टॉक?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल डीजल के सिमित इस्तेमाल की देशवासियों से अपील की है। ऐसे में आइए जानते हैं देश में कितने दिन का पेट्रोल डीजल और LPG स्टॉक बचा है?

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Petrol Diesel Reserve

दुनियाभर में जारी युद्ध और पश्चिम एशिया (West Asia) के हालातों ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। ऐसे समय में आम भारतीय नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या देश में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की किल्लत होने वाली है? इस बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत के पास पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार की ओर से यह बयान उन अटकलों को खत्म करने के लिए आया है जिनमें ईंधन की राशनिंग या कमी की बात कही जा रही थी। ऐसे में आइए जानते हैं देश में कितने दिन का पेट्रोल डीजल और LPG स्टॉक बचा है?

कितने दिन का स्टॉक बचा है?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच देशवासियों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि देश में ईंधन की सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मजबूत बैकअप तैयार कर रखा है। मौजूदा समय में देश के पास 69 दिनों का क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) और लगभग इतने ही दिनों की नेचुरल गैस का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा, रसोई के बजट को प्रभावित करने वाली LPG (घरेलू गैस) का भी 45 दिनों का भंडार सुरक्षित है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रियों के समूह (IGoM) की उच्च स्तरीय बैठक में यह पुष्टि की गई कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है और फिलहाल किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी होने की कोई संभावना नहीं है। केंद्रीय

सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से एलपीजी (रसोई गैस) का उत्पादन काफी बढ़ा दिया है। पहले जहां हर दिन 35,000 से 36,000 टन गैस का उत्पादन होता था, उसे अब बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है।

तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा और कीमतों का दबाव

भले ही देश के पास पर्याप्त स्टॉक हो, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। ईरान-इजरायल तनाव और लाल सागर (Red Sea) के रास्तों में दिक्कतों की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत में पिछले 70 दिनों से पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं, लेकिन इसका खामियाजा तेल कंपनियों को भुगतना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही तक यह कुल घाटा 2 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है। यह घाटा आने वाले समय में कीमतों में बढ़ोत्तरी का संकेत दे सकता है।

पीएम मोदी की अपील और नागरिकों की जिम्मेदारी

आने वाले आर्थिक दबाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से तेल बचाने की विशेष अपील की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग का अधिक से अधिक उपयोग करें। सरकार का मानना है कि यदि वैश्विक संकट लंबा चलता है, तो ईंधन की बचत से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सकेगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए हमारी छोटी सी बचत देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में बड़ा योगदान दे सकती है।

भारत ने जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच अपनी कूटनीतिक सूझबूझ का भी परिचय दिया है। समुद्री रास्तों में बढ़ते खतरों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे संकट के बावजूद, भारत ने अपने सभी 14 तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। यह भारत की मजबूत समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक पकड़ को दर्शाता है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि देश सुरक्षित है और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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