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एक इंसान कितने बैंक अकाउंट रख सकता है? क्या है RBI का नियम

क्या एक व्यक्ति कई बैंक अकाउंट खोल सकता है? RBI के नियम के अनुसार इसकी कोई लिमिट तय नहीं है, लेकिन ज्यादा अकाउंट रखने से चार्ज, पेनाल्टी और मैनेजमेंट की परेशानी बढ़ सकती है।

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Saving Account

आज के जमाने में शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जिसके पास बैंक अकाउंट (Saving Account) न हो। किसी के पास के तो किसी के पास 2 या उससे ज्यादा बैंक अकाउंट हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में बैंकिंग सिस्टम आज के समय में बेहद आसान और सुलभ हो चुका है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में घर बैठे मिनटों में नया बैंक खाता खुल जाता है। यही वजह है कि आज के समय में एक ही व्यक्ति के पास तीन, चार या उससे भी ज्यादा बैंक अकाउंट होना एक आम बात बन गई है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल या डर रहता है कि कहीं ज्यादा अकाउंट रखने से वे किसी मुसीबत में तो नहीं पड़ जाएंगे। ऐसे में आइए जानते हैं एक इंसान कितने बैंक अकाउंट (Bank Account) रख सकता है और इसके लिए RBI का नियम क्या कहता है?

कितने बैंक अकाउंट रख सकते हैं आप?

भले ही सरकार या आरबीआई आपको अनलिमिटेड अकाउंट खोलने की आजादी देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बहुत सारे अकाउंट रखना हमेशा फायदेमंद ही होता है। वित्तीय जानकारों और बैंकिंग विशेषज्ञों के मुताबिक, एक आम इंसान के लिए दो से तीन बैंक अकाउंट रखना सबसे आदर्श माना जाता है। इनमें से एक आपका सैलरी या मुख्य बिजनेस अकाउंट हो सकता है, दूसरा निवेश या घरेलू खर्चों के लिए और तीसरा आपातकालीन फंड (Emergency Fund) या लंबी अवधि की बचत के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे ज्यादा अकाउंट होने पर फायदे कम और मुसीबतें ज्यादा बढ़ने लगती हैं, जिन्हें मैनेज करना किसी भी आम व्यक्ति के लिए सिरदर्द बन सकता है।

ज्यादा बैंक अकाउंट रखने के नुकसान?

ज्यादा बैंक अकाउंट रखने का सबसे बड़ा नुकसान है 'मिनिमम बैलेंस' (Minimum Balance) को मेंटेन करना। आज के समय में लगभग हर कमर्शियल और प्राइवेट बैंक में खाता चालू रखने के लिए एक निश्चित न्यूनतम राशि रखना अनिवार्य होता है। यदि आपके पास 5-6 अकाउंट हैं और आप सब में मिनिमम बैलेंस नहीं रख पाते हैं, तो बैंक आप पर भारी पेनाल्टी (जुर्माना) लगाना शुरू कर देते हैं। इससे आपकी गाढ़ी कमाई का पैसा बिना किसी वजह के कटता रहता है। इसके अलावा, हर बैंक अकाउंट के साथ मिलने वाले डेबिट कार्ड (ATM Card) का सालाना मेंटेनेंस चार्ज, एसएमएस अलर्ट फीस और अन्य छिपे हुए चार्ज भी आपको हर साल चुकाने पड़ते हैं, जो आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।

एक और गंभीर समस्या जो ज्यादा अकाउंट होने पर आती है, वह है धोखाधड़ी या साइबर क्राइम का खतरा और खातों का 'इनेक्टिव' (Inactive) होना। जब हमारे पास कई सारे अकाउंट होते हैं, तो हम उन सभी के ट्रांजैक्शन पर नियमित रूप से नजर नहीं रख पाते। अगर किसी खाते में लंबे समय (आमतौर पर 2 वर्ष या उससे अधिक) तक कोई लेन-देन न किया जाए, तो बैंक उसे 'डॉर्मेंस' (Dormant) या निष्क्रिय घोषित कर देता है। ऐसे निष्क्रिय खातों का दुरुपयोग होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। साथ ही, जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं, तो आपको अपने सभी बैंक खातों की जानकारी और उनसे मिलने वाले ब्याज (Interest Income) का सही ब्योरा देना होता है। खातों की संख्या जितनी अधिक होगी, टैक्स फाइलिंग के समय कागजी कार्रवाई और गड़बड़ी की आशंका उतनी ही ज्यादा रहेगी।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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