रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का आज 7 अक्टूबर को फैसला आना है। बाजार और अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25% की बढ़ोतरी करेगा। अगर ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेट हाइक देखने को मिल सकता है।
ब्याज दर बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह महंगाई को लेकर बढ़ता जोखिम माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, कमजोर रुपया, ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने से RBI के सामने महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती बढ़ गई है।
फिलहाल, ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी को बाजार ने काफी हद तक प्राइस इन कर लिया है। इसलिए अब असली नजर इस बात पर होगी कि RBI आगे कितनी और रेट हाइक के संकेत देता है। इसके अलावा महंगाई और ग्रोथ को लेकर MPC का आकलन क्या है।
कितनी बढ़ेगी ब्याज दर और आगे क्या होगा?
मनीकंट्रोल के मुताबिक के 19 एक्सपर्ट के पोल में 15 ने 25 आधार अंक की उम्मीद जताई है, जबकि 4 ने दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का अनुमान लगाया है। ऐसे में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की घोषणा बाजार के लिए सरप्राइजिंग नहीं होगी। बल्कि, यह ज्यादा अहम है कि RBI आगे के लिए कैसा आउटलुक रखता है। यानी MPC भविष्य में भी रेट हाइक के संकेत देती है या पॉलिसी स्टांस न्यूट्रल रहता है।
क्या है बाजार का असली डर?
कुछ इकोनॉमिस्ट का अनुमान है कि फरवरी 2027 तक RBI कुल 75 आधार अंक तक रेट हाइक कर सकता है। यही बाजार की सबसे बड़ी चिंता है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि भारत में महंगाई अभी इतनी प्रचंड नहीं है कि रिजर्व बैंक को इस तरह से अपना पॉलिसी स्टांस हॉकिश करना पड़े और लगातार रेट हाइक करने की जरूरत पड़े।
महंगाई पर RBI का नया अनुमान होगा अहम ?
महंगाई का मौजूदा स्तर और रिजर्व बैंक का टारगेट व टोलरेंस बैंड तो पहले से ही स्पष्ट है। लेकिन, MPC आगे के लिए महंगाई पर क्या आकलन पेश करता है यह ज्यादा अहम होगा। RBI ने पिछली समीक्षा में FY27 के लिए CPI inflation का अनुमान 5% रखा था। अब बाजार यह देखेगा कि क्या केंद्रीय बैंक इस अनुमान को बढ़ाता है। क्योंकि, भारतीय बास्केट में क्रूड ऑयल के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने की वजह से महंगाई बेकाबू होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। RBI के लिए सिर्फ पॉलिसी रेट ही एक मुद्दा नहीं है। बैंकिंग सिस्टम में बड़ी मात्रा में सरप्लस लिक्विडिटी भी एक चुनौती है। इससे निपटने के लिए भी रिजर्व बैंक को रेट हाइक की जरूरत है।
