बिजनेस

रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे घर खरीददारों की मिलेगी राहत, बिल्डर का डिफॉल्ट नहीं बनेगा रोड़ा

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated May 31, 2023, 01:49 PM IST

Home Buyers Will Get Relief In Registration Of Flats:दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई इलाकों में घर खरीददारों की रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। आलम यह है कि कई सोसायटी में तो लोग 8-10 साल से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं। और वह फ्लैट या घर की ईएमआई लगातार चुका रहे हैं। और उस घर में रह भी रहे हैं। लेकिन फ्लैट उनके नाम से नहीं है।

Image

फंसे प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री होगी आसान

Home Buyers Will Get Relief In Registration Of Flats:बिल्डर के डिफॉल्ट के कारण लंबे समय से अपने फ्लैट की रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे, हजारों घर खरीददादों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ऐसे घरों की रजिस्ट्री के लिए नया नियम लाने की तैयारी में हैं। जिसके बाद अटके पड़े फ्लैट की रजिस्ट्री का रास्ता खुल जाएगा। अगर ऐसा होता है तो खास तौर से दिल्ली, एनसीआर के हजारों घर खरीददारों को सीधा फायदा मिलेगा। क्योंकि लंबे समय से हजारों लोग घर का लोन चुकाने या फिर उसका पूरा पेमेंट करने के बाद भी मालिकाना हक नहीं ले सके हैं। ऐसे में यह लोग या तो बिना मालिकाना हक के घर में रह रहे हैं या फिर उन्हें अभी तक पजेशन नहीं मिला है।

क्यों नहीं हुई है रजिस्ट्री

असल में दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई इलाकों में घर खरीददारों की रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। आलम यह है कि कई सोसायटी में तो लोग 8-10 साल से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं। और वह फ्लैट या घर की ईएमआई लगातार चुका रहे हैं। और उस घर में रह भी रहे हैं। लेकिन फ्लैट उनके नाम से नहीं है। यानी लोन चुकाने ,डाउन पेमेंट करने के बाद भी लोगों को अपने घर का मालिकाना हक नहीं मिला है।

ऐसा इसलिए हुआ है कि बिल्डर या तो डिफॉल्ट करके अपने को दिवालिया घोषित कर चुका है,या फिर उसका स्थानीय अथॉरिटी में बकाया है। इसकी वजह से उन फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। ऐसे में बिल्डर की गलती का खामियाजा घर खरीददार भुगत रहे हैं।

क्या होगा बदलाव

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अब इस संबंध में सरकार नए नियम लाने की तैयार कर रही है। जिसमें अगर कोई बिल्डर दिवालिया हो चुका है। या फिर उसका को मामला अटका हुआ है, तो भी घर या फ्लैट की रजिस्ट्री हो सकेगी। इस संबंध में NCLT से जरूरी राय लेने की तैयारी है। जिससे कि जरूरी बदलाव कर घर खरीददारों को राहत दी जा सके। अकेले नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली में 100 से ज्यादा प्रोजेक्ट हैं, जहां पर लोगों की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इस कदम से उन फ्लैट को भी बूस्ट मिलेगा, जहां पर बिल्डर के दिवालिया प्रक्रिया में जाने के बाद लोगों ने पजेशन न मिलने की आस में फाइनल पेमेंट रोक लिया है। नए बदलाव के बाद ऐसे फ्लैट और घरों की भी रजिस्ट्री हो सकेगी।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article