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ITR में दिखा ज्यादा रिफंड, लेकिन बैंक अकाउंट में आए कम पैसे? जानिए कहां कट गया आपका पैसा

ITR में दावा किए गए रिफंड से कम पैसा मिलने के कई कारण हो सकते हैं। आयकर विभाग आपके रिटर्न की दोबारा जांच करता है और टैक्स देनदारी, ब्याज, पुराने बकाये व आय के मिलान के आधार पर ही अंतिम रिफंड राशि तय करता है।

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ITR में दिखा ज़्यादा रिफंड, लेकिन बैंक अकाउंट में आए कम पैसे?

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद हर टैक्सपेयर को अपने टैक्स रिफंड का बेसब्री से इंतजार रहता है। आमतौर पर, जब आप अपना रिटर्न भरकर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) पूरा कर लेते हैं, तो उसके 4 से 5 हफ्ते के भीतर इनकम टैक्स विभाग आपके बैंक खाते में रिफंड का पैसा भेज देता है। लेकिन कई बार टैक्सपेयर्स के साथ एक अजीब स्थिति बन जाती है जब उन्होंने इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरा था तब रिफंड की रकम ज्यादा दिख रही थी, लेकिन जब पैसा बैंक खाते में आया तो वह काफी कम था। ऐसे में परेशान होना लाजिमी है कि आखिर बीच में पैसा कहां कट गया?

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि इनकम टैक्स विभाग की एक तय प्रक्रिया होती है। जब आप अपना रिटर्न (ITR) जमा करते हैं, तो विभाग आंख मूंदकर उसे स्वीकार नहीं करता। प्रोसेसिंग के दौरान विभागआपके द्वारा दी गई हर जानकारी का दोबारा गहराई से मिलान करता है। इसी मिलान के बाद ही आपका अंतिम यानी फाइनल रिफंड तय किया जाता है।

क्यों कम आया पैसा?

रिफंड की रकम कम होने की सबसे पहली और बड़ी वजह है जानकारियों का आपस में न मिलना (Data Mismatch)। ITR फाइल करते समय विभाग आपकी तरफ से दी गई डिटेल्स का मिलान आपके Form 26AS, एआईएस (AIS), टीआईएस (TIS) और टीडीएस (TDS) रिकॉर्ड से करता है। अगर आपने बैंक से मिले ब्याज या शेयर बाजार/म्यूचुअल फंड से हुए मुनाफे (Capital Gains) को अपने रिटर्न में नहीं दिखाया है, तो विभाग उसे खुद ही जोड़ देता है। इसके अलावा, गलत टैक्स छूट (Exemptions) का दावा करने या एडवांस टैक्स की जानकारी गलत भरने पर भी रिफंड की रकम घट जाती है। जब भी विभाग ऐसा कोई बदलाव करता है, तो वह टैक्सपेयर को धारा 143(1) के तहत एक 'इंटीमेशन नोटिस' भेजकर इसकी पूरी जानकारी देता है।

रिफंड कम होने की दूसरी बड़ी वजह है पुराना टैक्स बकाया (Past Tax Demand)। अगर पिछले कुछ सालों में आपका कोई टैक्स बकाया रह गया था और आपने उसे नहीं चुकाया है, तो इनकम टैक्स विभाग के पास यह अधिकार होता है कि वह उस पुराने बकाये को आपके इस साल के रिफंड से एडजस्ट (काट) ले। हालांकि, यह पैसा काटने से पहले विभाग ई-फाइलिंग पोर्टल पर आपको एक नोटिस देता है, जहां आप इस कटौती पर अपनी सहमति या असहमति दर्ज करा सकते हैं।

ये भी है कारण

इसके अलावा, देरी से ITR भरना भी रिफंड को कम कर देता है। अगर आप तय समय सीमा के बाद रिटर्न भरते हैं या साल के दौरान एडवांस टैक्स समय पर जमा नहीं करते, तो इनकम टैक्स कानून की धारा 234A, 234B और 234C के तहत आप पर ब्याज और लेट फीस लगा दी जाती है। यह पेनल्टी आपके रिफंड के पैसे में से ही काट ली जाती है।

पूरा रिफंड पाने के लिए क्या करें?

अगर आप चाहते हैं कि आपका रिफंड एक रुपया भी न कटे, तो अगली बार ITR भरने से पहले Form 26AS और AIS को अच्छी तरह चेक कर लें और उसमें दिख रही कमाई को ही रिटर्न में भरें। अपनी कमाई के सभी स्रोतों को ईमानदारी से दिखाएं, बिल्कुल सही ITR फॉर्म का चुनाव करें और अपने बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट (Pre-validate) करना न भूलें। समय पर ई-वेरिफिकेशन करने से आपका रिफंड बिना किसी कटौती के और बेहद जल्दी आपके खाते में आ जाएगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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