देश में जीएसटी (GST) लागू हुए 10 साल होने वाले हैं। अब सरकार का मकसद सिर्फ टैक्स इकट्ठा करना नहीं है। सरकार अब एआई (AI- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से टैक्स चोरी रोकने, कारोबारियों को जल्दी रिफंड देने और टैक्स की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने पर ध्यान दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे और मझोले व्यापारियों (MSMEs) के लिए टैक्स के काम को आसान और सस्ता बनाना है, साथ ही टैक्स चोरी को पूरी तरह से रोकना है।
सरकार जीएसटी, आयकर और सीमा शुल्क के डेटाबेस को आपस में जोड़ रही है ताकि जोखिम का बेहतर आकलन किया जा सके, कर चोरी की पहचान आसान हो और मैन्युअल हस्तक्षेप कम किया जा सके। साथ ही एआई और डेटा विश्लेषण के जरिये अनुपालन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और दक्ष बनाया जा रहा है।
देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में एक
जीएसटी को देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिना जाता है। इसने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाया है, करदाताओं का दायरा बढ़ाया है, अनुपालन को मजबूत किया है और सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है। एक जुलाई, 2017 को आधी रात में संसद के केंद्रीय कक्ष में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की शुरुआत की थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ’गुड एंड सिंपल टैक्स’ बताते हुए कहा था कि इससे व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
एक समान टैक्स व्यवस्था लागू की गई
जीएसटी लागू करने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के 17 प्रकार के कर तथा 13 तरह के उपकर (सेस) लागू थे। जीएसटी में इन्हें समाहित कर पूरे देश के लिए एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई, जिससे ’एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को बल मिला। इस व्यापक सुधार को लागू करने में तत्कालीन वित्त मंत्री स्व. अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के लिए लंबी बातचीत की थी। जेटली ने इसे दुनिया की सबसे जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों में से एक के पुनर्गठन की बड़ी उपलब्धि बताया था।
पहले 4 टैक्स स्लैब थे अब तीन
जीएसटी लागू होने के समय देश में पंजीकृत करदाताओं की संख्या करीब 66.5 लाख थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है। इसे अर्थव्यवस्था के तेजी से संगठित होने का संकेत माना जा रहा है। शुरुआत में जीएसटी में चार कर स्लैब-5, 12, 18 और 28 प्रतिशत थे। वहीं विलासिता वाली वस्तुओं और अहितकर उत्पादों मसलन तंबाकू आदि पर 28 प्रतिशत के कर के अलावा अतिरिक्त उपकर भी लगाया गया। बाद में कर प्रणाली में सुधार के तहत 22 सितंबर, 2025 से नई दो-स्तरीय जीएसटी व्यवस्था लागू की गई। इसके तहत अधिकांश आवश्यक वस्तुओं को पांच प्रतिशत और सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं को 18 प्रतिशत कर स्लैब में रखा गया। वहीं केवल लक्जरी और अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की उच्च दर लागू रखी गई।
बदलाव से जरूरी सामान के दाम घटे
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अधिकांश वस्तुएं सस्ती हुई हैं और उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक नकदी बच रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार नई जीएसटी व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना है। जीएसटी की दरों का निर्धारण जीएसटी परिषद करती है, जिसमें केंद्र और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
अभी तक पेट्रोयिम उत्पाद शामिल नहीं
जीएसटी लागू करते समय केंद्र और राज्यों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी संविधान संशोधन के तहत जीएसटी के दायरे में शामिल किया जाएगा। हालांकि, यह फैसला जीएसटी परिषद पर छोड़ दिया गया था कि कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और प्राकृतिक गैस को किस तारीख से जीएसटी के तहत लाया जाए। इस संबंध में जीएसटी परिषद में विमान ईंधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाने पर कुछ चर्चा हुई थी, लेकिन राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। ऐसे में इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
