बिजनेस

चीनी कीमतों पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला! कोई भी डीलर 30 दिन से अधिक समय तक नहीं रख सकेगा स्टॉक

Sugar Price Control: केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए डीलरों पर 30 दिन की स्टॉक सीमा और 4,000 क्विंटल की अधिकतम सीमा लागू की है। यह नियम 1 अगस्त से प्रभावी होगा।

Image

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने लगाई स्टॉक लिमिट

Photo : iStock

Sugar Price Control : चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी किया है कि अब देश में कोई भी चीनी डीलर 30 दिन से ज्यादा समय तक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके साथ ही डीलरों के लिए अधिकतम 4,000 क्विंटल चीनी रखने की सीमा तय (Sugar stock limit) कर दी गई है। सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों में स्थिरता लाने के उद्देश्य से लिया गया है। यह नया नियम 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले चीनी व्यापारियों और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की कोई तय सीमा नहीं थी। हालांकि, सरकार पहले से ही चीनी मिलों के लिए हर महीने बिक्री का कोटा निर्धारित करती रही है।

तीन महीने में बढ़ी चीनी की कीमतें

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब पिछले कुछ महीनों में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में तेजी देखने को मिली है। पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 39 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद सरकार ने बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्टॉक सीमा लगाने का निर्णय लिया। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत यह आदेश जारी किया है। अधिसूचना में कहा गया है कि कोई भी चीनी डीलर चीनी प्राप्त होने की तारीख से 30 दिन से अधिक समय तक उसका भंडारण नहीं कर सकता। साथ ही किसी भी समय और किसी भी स्थान पर 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी स्टॉक में रखने की अनुमति नहीं होगी।

ऑनलाइन पोर्टल पर देनी होगी स्टॉक की जानकारी

सरकार ने सभी चीनी डीलरों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करें। इससे सरकार को बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, यह नियम सरकारी भंडार में रखी गई चीनी, राज्य सरकारों द्वारा अधिकृत डीलरों या सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत उचित मूल्य की दुकानों के लिए रखे गए स्टॉक पर लागू नहीं होगा।

चीनी निर्यात पर भी सरकार की नजर

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार पहले ही चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा चुकी है। मई में केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात को 30 सितंबर तक रोकने का फैसला लिया था। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना और आम उपभोक्ताओं को महंगी चीनी से राहत देना था। सरकार ने विपणन वर्ष 2025-26 के लिए करीब 16 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है। वहीं, एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के उपयोग के बाद भी देश में चीनी उत्पादन बेहतर रहने का अनुमान लगाया गया है। अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत में करीब 279 लाख टन चीनी का उत्पादन हो सकता है, जबकि पिछले वर्ष 2024-25 में उत्पादन 261 लाख टन रहा था।

इस्मा ने सरकार के फैसले का किया स्वागत

चीनी उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है। संगठन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि सरकार का यह कदम देश में चीनी की आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर और नियंत्रित रखने में मदद करेगा। इससे पहले ISMA और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने भी कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। संगठनों ने थोक व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और बड़े खरीदारों से अपील की थी कि वे कीमतों में तेजी के बीच जरूरत से ज्यादा खरीदारी या जमाखोरी से बचें।

सरकार का लक्ष्य: उपभोक्ताओं को राहत

केंद्र सरकार का मानना है कि चीनी का पर्याप्त स्टॉक बाजार में उपलब्ध रहने से कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। स्टॉक सीमा लागू होने से जमाखोरी पर रोक लगेगी और बाजार में कृत्रिम कमी पैदा नहीं होगी। सरकार आने वाले महीनों में चीनी की कीमतों और उपलब्धता पर लगातार नजर बनाए रखेगी, ताकि आम लोगों को महंगी चीनी का सामना न करना पड़े।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article