Tulbul Project: केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में वुलर झील पर तुलबुल परियोजना को पुनः शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को निलंबित किए जाने के बाद अब पाकिस्तान की सहमति की जरुरत नहीं है।
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद नई पनबिजली परियोजनाओं पर काम
मनोहर लाल ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है। इसके मद्देनजर सरकार अब नई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पहले पाकिस्तान की सहमति आवश्यक होती थी
मंत्री ने कहा कि पहले जब भी कोई परियोजना शुरू करनी होती थी, तो हमें पाकिस्तान से चर्चा करनी पड़ती थी और उनकी सहमति के बिना कोई कदम नहीं उठा सकते थे। अब स्थिति बदल गई है और सहमति की जरूरत समाप्त हो गई है।
तुलबुल परियोजना की पृष्ठभूमि
तुलबुल परियोजना की योजना 1981 में बनाई गई थी, लेकिन पाकिस्तान की आपत्तियों के कारण 1987 में इसे रोक दिया गया था। यह परियोजना उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के निंगली के पास वुलर झील के नीचे तीन लाख एकड़ फुट जल भंडारण क्षमता वाला बैराज बनाने की थी।
परियोजना के महत्व और तकनीकी विवरण
तुलबुल बैराज की लंबाई 439 फुट और चौड़ाई 40 फुट होगी। इसका मुख्य उद्देश्य झेलम नदी के जल स्तर को स्थिर रखना और जल प्रबंधन को बेहतर बनाना था।
पाकिस्तान की धमकियों पर केंद्र का सख्त रुख
मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पाकिस्तान को जो करना है, करने दिया जाए। भारत पहले ही जवाब दे चुका है और अगर पाकिस्तान किसी भी तरह की हरकत करता है, तो उसे उसी तरह का जवाब मिलेगा।
जल्द ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होगी
मंत्री ने कहा कि परियोजना को जल्द ही फिर से शुरू कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी ताकि आगे की कार्यवाही की जा सके। (भाषा इनपुट के साथ)
