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3 लाख लोगों ने बैंक डूबने पर वापस लिया पैसा, आप भी कर सकते हैं ऐसा, ये है नियम

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 12, 2022, 07:34 PM IST

Bank Deposit Insurance Scheme: नियमों के मुताबिक बैंक ग्राहकों को 5 लाख रुपये तक का ही इंश्योरेंस मिलता है। इसके तहत बैंकों को डूबने की स्थिति में आरबीआई के नियमों के अनुसार AID में शामिल होने के 45 दिन के अंदर सभी ग्राहकों की जमाओं और कर्ज की जानकारी उपलब्ध करानी होती है। उसके बाद 90 दिन के अंदर DICGC को ग्राहकों के पैसे लौटाने पड़ते हैं।

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बैंक डूबने पर मिलता है पैसा

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KEY HIGHLIGHTS
  • सरकार ने 15 महीने में करीब 4,005 करोड़ रुपये चुकाए हैं।
  • 35 बैंकों में कोऑपरेटिव बैंक ही प्रमुख रूप से शामिल हैं।
  • यह रकम एक सितंबर 2021 से लेकर नवंबर 2022 के दौरान लौटाई गई है।

Bank Deposit Insurance Scheme: अगर आपने किसी ऐसे बैंक में पैसा जमा कर रखा था, जो डूब गया या फिर उसकी वित्तीय हालत ऐसी हो गई है कि उसे जमा-निकासी पर प्रतिबंध लग गया है। तो आप भी अपने डूबे पैसे को निकाल सकते हैं। पिछले 15 महीने में देश के 35 बैंकों से 3 लाख लोगों ने ऐसा किया है। इसके तहत सरकार ने करीब 4 हजार करोड़ रुपये लोगों को लौटाए हैं। बैंक ग्राहकों को यह सुविधा डिपॉजिट इन्श्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन कानून (DICGC) के तहत मिलती है। इसके तहत बैंक में ग्राहकों के जमाओं पर 5 लाख रुपये इश्योरेंस की गारंटी मिलती है।

35 बैंकों से लोगों ने वापस लिए पैसे

सोमवार को वित्त राज्य मंत्री डॉ भागवत किशनराव कराड ने लोक सभा में दिए लिखित जवाब में बताया कि देश के 35 बैंकों के 3,06,146 ग्राहकों ने डिपॉजिट इन्श्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन कानून के तहत पैसा क्लेम किया है। इनके जरिए सरकार ने 4,05,510 लाख रुपये यानी 4,005 करोड़ रुपये चुकाए हैं। यह रकम एक सितंबर 2021 से लेकर नवंबर 2022 के दौरान लौटाई गई है।

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इन बैंक ग्राहकों का वापस हुआ पैसा

5 लाख रुपये तक इंश्योरेंस, 90 दिन में पैसा वापस

डिपॉजिट इन्श्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन एक्ट-2021 के तहत अगर कोई बैंक डूब जाता है, तो उसके ग्राहकों को 5 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर मिलता है। यानी कि अगर बैंक डूब जाता है और वह ग्राहकों के रकम चुकाने में फेल हो जाता है, तो नियमों के मुताबिक ग्राहकों को 5 लाख रूपये तक की राशि वापस मिल जाती है। इसके तहत बैंकों को डूबने की स्थिति में आरबीआई के नियमों के अनुसार AID में शामिल होने के 45 दिन के अंदर सभी ग्राहकों की जमाओं और कर्ज की जानकारी उपलब्ध करानी होती है। उसके बाद 90 दिन के अंदर DICGC को ग्राहकों के पैसे लौटाने पड़ते हैं।

5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं मिलता है पैसा

नियमों के मुताबिक बैंक ग्राहकों को 5 लाख रुपये तक का ही इंश्योरेंस मिलता है। यानी अगर किसी ग्राहक के बैंक में 5 लाख रुपये से ज्यादा पैसा जमा है और उसका बैंक डूब गया तो भी उसे 5 लाख रुपये ही वापस मिलेंगे। वहीं अगर किसी ग्राहक के 5 लाख रुपये से कम रकम जमा है तो उस स्थिति में पूरी जमा रकम के बराबर पैसा मिल जाता है। रकम की राशि कुल जमाओं के आधार पर तय होती है। यानी अगर किसी ग्राहक के बैंक के में कई खाते हैं तो सभी को जोड़कर कुल रकम मानी जाएगी।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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