पिछले 4 दिनों यानी 10 से 13 मई के बीच देश में आर्थिक और वित्तीय स्तर पर कई बदलाव हुए, जिसने आम आदमी की रसोई से लेकर तिजोरी तक का बजट हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां वैश्विक कारणों से सोने-चांदी (Gold) की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर दूध (Milk) और खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों ने मध्यम वर्ग की जेब पर सीधा हमला किया है। अगर आप भी अपनी मंथली प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि बीते 96 घंटों में आपके खर्चों की लिस्ट में क्या-क्या महंगा हो चुका है।
सोने और चांदी की चमक हुई तेज
सर्राफा बाजार में पिछले 4 दिनों के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की बढ़ती मांग के कारण, सोने के दाम में प्रति 10 ग्राम उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी की बात करें तो इसके दाम भी रॉकेट की तरह ऊपर गए हैं। औद्योगिक मांग और शादियों के सीजन की शुरुआत के संकेतों ने इन कीमती धातुओं को और महंगा कर दिया है। निवेशकों के लिए यह अच्छा समय हो सकता है, लेकिन मध्यम वर्ग के लिए अब गहने खरीदना पहले से कहीं अधिक खर्चीला हो गया है।
दूध की कीमतों ने बिगाड़ा बजट
आम आदमी के लिए सबसे बड़ा झटका दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से लगा है। पिछले कुछ दिनों में प्रमुख डेयरी कंपनियों ने दूध के दाम 2 रुपये से लेकर 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं। कंपनियों का तर्क है कि चारे की बढ़ती कीमतों और ट्रांसपोर्टेशन खर्च में इजाफे के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। दूध एक ऐसी बुनियादी जरूरत है जिसका सीधा असर बच्चों के पोषण और घर के मासिक खर्च पर पड़ता है। दूध महंगा होने का मतलब है कि अब दही, पनीर और घी जैसी अन्य डेयरी चीजों के दाम भी आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं।
खाद्य तेल और दालों का हाल
सिर्फ दूध ही नहीं, पिछले 4 दिनों में किराने की दुकान पर भी महंगाई का असर दिखने लगा है। कुछ खास किस्म की दालों और खाद्य तेलों के थोक भाव में मामूली तेजी आई है। हालांकि सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन सप्लाई चेन में बाधा आने की खबरों ने बाजार में डर पैदा कर दिया है। मसालों के दाम भी स्थिर होने के बजाय ऊपरी स्तर पर बने हुए हैं, जिससे थाली का स्वाद अब महंगा पड़ रहा है।
पेट्रोल-डीजल और आरबीआई का रुख
इन 4 दिनों के दौरान कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी हलचल रही है। हालांकि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विशेषज्ञों की नजरें लगातार इन पर टिकी हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है। आरबीआई ने भी अपनी हालिया टिप्पणियों में खाद्य महंगाई को लेकर चिंता जताई है और ब्याज दरों पर कड़ा रुख बरकरार रखा है।
