बिजनेस

Gold Prices Forecast: निकट भविष्य में 6-8% लुढ़केगा सोना, 12-15 महीनों में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर जा सकती हैं कीमतें

Gold Prices Forecast: एक्सपर्ट्स के मुताबिक निकट भविष्य में सोने में 6-8% गिरावट संभव है। हालांकि 12-15 महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमतें 5,500 डॉलर के पार पहुंच सकती हैं, इसलिए गिरावट में चरणबद्ध खरीदारी की सलाह है।

Image

गोल्ड में 6-8% करेक्शन की तैयारी: गिरावट में ही है असली कमाई, जानें मोतीलाल ओसवाल की रणनीति

Photo : iStock

Gold Prices : आने वाले समय में सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह चिंता नहीं बल्कि एक बेहतरीन अवसर है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) ने अपनी 'H1 2026 प्रेशियस मेटल्स आउटलुक' रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि निकट भविष्य (Gold market forecast) में सोने में 6 से 8 प्रतिशत तक का करेक्शन (गिरावट) आ सकता है। हालांकि, इस अस्थायी गिरावट के बाद सर्राफा बाजार में जोरदार वापसी देखने को मिलेगी और अगले 12 से 15 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर सकता है। फर्म का मानना है कि निवेशकों को बाजार के निचले स्तर का इंतजार करने के बजाय किस्तों में (स्टैगर्ड तरीके से) खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार के लक्ष्य

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 6-8% टूटने के बाद पहले 4,800 डॉलर और फिर 5,500 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकता है। अगर भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर का विनिमय दर (USD/INR) 95.5 के स्तर पर रहता है, तो भारतीय बाजार (घरेलू स्तर) में सोने में खरीदारी का सही स्तर 1,30,000 रुपये से 1,33,000 रुपये के बीच बनता है। यहां से रिकवरी आने पर मध्यम अवधि में सोने का पहला लक्ष्य 1,68,000 रुपये और उसके बाद 1,93,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रहने की संभावना जताई गई है। टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें:-सोने का आज का ताजा भाव, 5 अगस्त 2026

बाजार का बदलता मिजाज और दबाव के कारण

साल 2026 की शुरुआत में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, मजबूत ईटीएफ (ETF) इनफ्लो, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कारण सोने ने शानदार बढ़त दर्ज की थी। हालांकि, दूसरी तिमाही (Q2) में समीकरण बदल गए। व्यापारिक टैरिफ और अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से महंगाई की चिंताएं बढ़ गईं, जिससे बाजार को यह संकेत मिला कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत हुए, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग थोड़ी कमजोर पड़ी है। अब भू-राजनीतिक तनावों का सोने की कीमतों पर तुरंत सीधा सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है।

निवेशकों के लिए सलाह और चांदी का आउटलुक

रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने का लंबी अवधि का निवेश आधार बेहद मजबूत है, लेकिन मौजूदा माहौल जल्दबाजी के बजाय धैर्य रखने की मांग करता है। जब तक वास्तविक ब्याज दरों में बड़ी गिरावट नहीं आती, तब तक सोना दायरे में रह सकता है या कुछ और टूट सकता है। 12 से 15 महीनों के नजरिए वाले निवेशकों को इस गिरावट का फायदा उठाकर धीरे-धीरे खरीदारी करनी चाहिए, क्योंकि केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय स्थिति बिगड़ने जैसे कारण सोने को लगातार समर्थन देंगे। वहीं, चांदी के निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे इसकी अधिक उतार-चढ़ाव वाली प्रकृति का ध्यान रखें, क्योंकि यह कीमती धातु होने के साथ-साथ औद्योगिकीकरण और विद्युतीकरण की मांग से भी सीधी जुड़ी हुई है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article