Gold Price : वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में जारी हालिया स्थिरता (कंसोलिडेशन) को लेकर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) ने एक अहम चेतावनी जारी की है। काउंसिल के अनुसार, सोने के दामों में दिख रहा यह ठहराव केवल एक अस्थाई चरण हो सकता है। अमेरिका में लगातार बढ़ रही ट्रेजरी यील्ड (बॉन्ड यील्ड) और मजबूत होता अमेरिकी डॉलर आने वाले समय में सोने की चमक को फीका कर सकते हैं और इसकी कीमतों पर भारी दबाव बना सकते हैं।
बाजार का हाल और 10-वर्षीय यील्ड का बढ़ता ट्रेंड
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछला हफ्ता सोने के बाजार के लिए अपेक्षाकृत शांत रहा और कीमतें एक सीमित दायरे में बनी रहीं। हालांकि, इसी दौरान अमेरिका में 10-वर्षीय वास्तविक (रियल) यील्ड में तेज उछाल देखा गया है। यह यील्ड अपने 2025 के उच्चतम स्तर 2.44 प्रतिशत को पार करने की ओर बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अगली बढ़ोतरी की उम्मीदों को समय से पहले आंकना शुरू कर दिया है। काउंसिल का कहना है कि अगर 10-वर्षीय यील्ड 2.44 प्रतिशत के स्तर को पार कर ऊपर बनी रहती है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि मुख्य ट्रेंड अब निचले या समतल स्तर से ऊपर की ओर शिफ्ट हो चुका है। इस बदलाव का सीधा और नकारात्मक असर शेयर बाजारों पर पड़ेगा, जिससे सोने की कीमतों पर भी दबाव गहराने की आशंका है।
कीमतों में हालिया रिकवरी और तकनीकी संकेत
इसके बावजूद, हाल के दिनों में निचले स्तरों पर हुई खरीदारी (डिप-बाइंग) ने सोने को सहारा दिया है। लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के गोल्ड प्राइस पीएम के अनुसार, सोने की कीमत में 1.8 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त देखी गई और यह 4,067 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। इस उछाल के साथ सोने ने 4,000 डॉलर का महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर फिर से हासिल कर लिया है, जिससे इस साल की शुरुआत से अब तक हुई गिरावट घटकर 6.9 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, तकनीकी नजरिए से देखें तो विश्लेषकों का मानना है कि पिछले हफ्ते आई यह रिकवरी जनवरी से चले आ रहे गिरावट के ट्रेंड में सिर्फ एक अस्थाई सांस (ब्रीदर) हो सकती है। अगर कीमतें फिर से गिरती हैं, तो सोने के लिए अगला बड़ा तकनीकी सपोर्ट स्तर 3,857 डॉलर से 3,887 डॉलर प्रति औंस के बीच देखा जा रहा है।
फेडरल रिजर्व की बैठक और महंगाई के आंकड़े तय करेंगे दिशा
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस हफ्ते होने वाली अपनी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और इन्हें यथावत रखेगा। लेकिन, मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या संकेत दिए जाते हैं। अगर फेड अध्यक्ष की ओर से सख्त रुख (हॉकिश सिग्नल) दिखाया जाता है, या फिर गुरुवार को आने वाले पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई के आंकड़े उम्मीद से अधिक आते हैं, तो इससे ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर में और तेजी आ सकती है। इससे सोने पर दोबारा गिरावट का दबाव बन सकता है।
बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने में दिख रही मौजूदा स्थिरता लंबी अवधि की सुरक्षित-निवेश (सेफ-हेवन) मांग को नहीं दर्शाती, बल्कि यह मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड से जुड़ी कम अवधि की मैक्रो-आर्थिक चिंताओं का परिणाम है।
