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सोना-चांदी में तेज गिरावट के बाद अब चेतावनी के संकेत, क्या आगे और दर्द बाकी है?

Gold-Silver Prices: पिछले एक साल में कीमती धातु सोने और चांदी के बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। सोने की कीमतें 73% बढ़ीं, जबकि चांदी ने 171% का शानदार रिटर्न दिया। लेकिन जनवरी के आखिरी दो कारोबारी दिनों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और सवाल खड़ा किया है कि क्या चांदी में अभी और गिरावट आएगी।

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निवेशकों के लिए चेतावनी की घंटी! (तस्वीर-isock/Canva)

Gold-Silver Prices: पिछले एक साल में कीमती धातु सोने-चांदी के बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली है। जहां सोने की कीमतों में 73% की मजबूत तेजी आई, वहीं चांदी ने इस प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ते हुए करीब 171% का रिटर्न दिया। हालांकि, जनवरी के आखिरी दो कारोबारी सत्रों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चांदी में आगे और दर्द बाकी है।

अचानक आई भारी गिरावट से निवेशक घबराए

शुक्रवार को चांदी की कीमतों में करीब 27% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह फिसलकर करीब 84 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। वहीं सोने की कीमतों में भी 9% की गिरावट देखी गई और यह 4,865 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार में यह हलचल उस समय तेज हुई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वार्श को अमेरिकी फेडरल रिजर्व का चेयरमैन नॉमनेट किया। इस फैसले से निवेशकों में ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

चांदी ज्यादा तेज, लेकिन ज्यादा जोखिम भी

द कन्वर्सेशन के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की जबरदस्त तेजी के साथ उसकी अस्थिरता (वोलैटिलिटी) भी काफी ऊंची रही। चांदी की सालाना वोलैटिलिटी करीब 36% रही, जो सोने की 20% वोलैटिलिटी से करीब दोगुनी है। इसका साफ मतलब है कि चांदी जितनी तेजी से ऊपर जाती है, उतनी ही तेजी से नीचे भी आ सकती है। मौजूदा गिरावट इसी जोखिम की याद दिलाती है।

क्या होता है गोल्ड-सिल्वर रेशियो?

गोल्ड-सिल्वर रेशियो एक महत्वपूर्ण पैमाना है, जिससे सोने और चांदी की आपसी कीमत का अंदाजा लगाया जाता है। इसे एक औंस सोने की कीमत को एक औंस चांदी की कीमत से भाग देकर निकाला जाता है। यह बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी। आमतौर पर जब यह रेशियो ज्यादा होता है, तो माना जाता है कि सोना चांदी के मुकाबले महंगा है, और जब रेशियो कम होता है, तो चांदी को महंगी माना जाता है।

50 से नीचे का स्तर क्यों है अहम?

हाल ही में गोल्ड-सिल्वर रेशियो 46 तक गिर गया था, लेकिन चांदी में तेज गिरावट के बाद यह फिर से उछलकर 57 पर पहुंच गया। जब यह रेशियो 50:1 से नीचे चला जाता है, तो इसका मतलब होता है कि चांदी अब सस्ती नहीं रही। इतिहास में ऐसे स्तरों के बाद अक्सर चांदी की कीमतों में तेज सुधार (करेक्शन) देखा गया है और वह भी सोने की तुलना में ज्यादा तेजी से।

2011 जैसी स्थिति की याद

गोल्ड-सिल्वर रेशियो का 50 से नीचे जाना आमतौर पर बहुत तेज चांदी रैली के दौरान ही देखा जाता है, जैसे 2011 में हुआ था। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि चांदी बिल्कुल महंगी हो गई है, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि चांदी की तुलना में जो बड़ी तेजी आनी थी, वह काफी हद तक पूरी हो चुकी है। इसके बाद रिटर्न असमान और गिरावट ज्यादा तेज हो सकती है।

जब सोना बोलता है और चांदी ‘चिल्लाती’ है

एक्सपर्ट के मुताबिक जब सोना बढ़ता है तो यह आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और करेंसी के कमजोर होने जैसे जोखिमों की ओर इशारा करता है। लेकिन जब चांदी बहुत तेज रफ्तार से सोने को पछाड़ते हुए ऊपर जाती है, तो यह अक्सर बाजार के सट्टा (स्पेकुलेटिव) चरण का संकेत होता है। इतिहास गवाह है कि यह चरण कई बार निवेशकों के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय धातुओं को लेकर ‘सब या कुछ नहीं’ जैसा फैसला लेने के बजाय संतुलन बनाए रखना ज्यादा जरूरी है। निवेशकों को अपनी चांदी की होल्डिंग का कुछ हिस्सा कम करके उसे सोने में शिफ्ट करना चाहिए। ऐसा करने से पोर्टफोलियो में स्थिरता आती है, क्योंकि जोखिम वाले दौर में सोना आमतौर पर बेहतर प्रदर्शन करता है।

आगे कितना गिर सकती है चांदी?

चांदी को लेकर चेतावनी और भी सख्त होती दिख रही है। एक्सपर्ट के मुताबिक चांदी की कीमतों में कमजोरी आगे भी जारी रह सकती है। उनका अनुमान है कि जून 2026 के अंत तक चांदी 50 डॉलर प्रति औंस यानी करीब 2 लाख रुपये तक फिसल सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए सावधानी और अनुशासन इस समय सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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