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पुतिन की गैस स्ट्राइक से जर्मनी पस्त,मंदी में यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated May 25, 2023, 03:30 PM IST

Germany Enters Recession:जर्मनी की इकोनॉमी गैस पर बेहद निर्भर है। वहां की जरूरत का करीब 27 फीसदी आपूर्ति जर्मनी से होती है। उसमें भी रूस से 55 फीसदी गैस का आयात होता है। जाहिर है जर्मनी की इकोनॉमी रूस पर बेहद निर्भर रही है।

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जर्मनी में आ गई मंदी

Germany Enters In Recession:दुनिया की चौथी और यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी पस्त हो गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार जर्मनी में लगतार दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ रेट निगेटिव रही है। जिसका सीधा मतलब बै कि जर्मनी में मंदी आ गई है। पहली तिमाही में जर्मनी की ग्रोथ रेट -0.3 फीसदी रही है। इसके पहले दिसंबर की तिमाही में भी इकोनॉमी में 0.5 फीसदी की गिरावट आई थी। जर्मनी में मंदी की सबसे बड़ी वजह से रूस से मिलने वाली गैस में कटौती होना है। जिसकी वजह से न केवल महंगाई बढ़ी है बल्कि लोगों की खरीद क्षमता भी घटी है। जिसका निगेटिव असर उद्योग धंधों पर हुआ है।

क्या है पुतिन की गैस स्ट्राइक

असल में जर्मनी की इकोनॉमी गैस पर बेहद निर्भर है। वहां की जरूरत की करीब 27 फीसदी आपूर्ति गैस से होती है। उसमें भी रूस से 55 फीसदी गैस का आयात होता है। जाहिर है जर्मनी की इकोनॉमी रूस पर बेहद निर्भर रही है। लेकिन रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं। रूस पर जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाना शुरू किया तो रूसी राष्ट्रपित व्लादिमिर पुतिन ने भी विरोध स्वरूप रूस को गैस सप्लाई बड़े पैमाने पर कटौती कर दी है। इसके साथ ही जर्मनी ने भी सख्त रुख अपनाया है। इस कारण सितंबर 2022 के बाद से रूस से गैस आपूर्ति ठप है। ऐसा नहीं है कि जर्मनी को इस खतरे का अंदाजा नहीं था। इसे देखते हुए जर्मनी की तेल कंपनियों ने कतर के साथ सालान तौर पर 20 लाख टन गैस खरीदने का समझौता किया है। हालांकि ये सप्लाई 2026 से शुरू होगी।

ऐसे में रूस पर निर्भरता जर्मनी पर भारी पड़ रही है। और वहां के लोगों को महंगाई और बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2023 में जर्मनी में करीब 12.6 लाख लोग बेरोजगार थे। और वहां पर बेरोजगारी दर 2.9 फीसदी पर पहुंच गई थी। वहीं अप्रैल में महंगाई दर 7.2 फीसदी पर है।

कोरोना काल में भी आई थी मंदी

जर्मनी में इसके पहले कोरोना के दौर में साल 2020 में मंदी आई थी। उस दौरान लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप होने से ऐसा हुआ था। लेकिन उस बार की मंदी और इस बार की मंदी में बड़ा अंतर है। इस समय आर्थिक गतिविधियां ठप नहीं है। बल्कि लोगों की इनकम घटने और महंगाई बढ़ने का असर खर्च क्षमता पर हुआ है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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