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ET Now Global Business Summit 2024: AI से घबराए नहीं, विकास में करेगा मदद, ईटी नाउ समिट में बोले कॉग्निजेंट के सीईओ

ET Now Global Business Summit 2024: कुमार ने कहा कि टेक सर्विस कंपनियां टेक्नोलॉजी असंतुलन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिसमें जेनेरेटिव एआई अगली ट्रांसफॉर्मेटिव फोर्स के रूप में उभर रही है। उन्होंने आर्थिक समृद्धि लाने की इसकी क्षमता के बारे में आशा जताई है।

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ET Now Global Business Summit 2024

Photo : Times Now Digital

ET Now Global Business Summit 2024: जेनेरेटिव एआई अगली ट्रांसफॉर्मेटिव फोर्स है और उद्यमिता के भविष्य को आकार देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। टेक सर्विस कंपनियां तकनीकी असंतुलन पर ध्यान दे रही हैं, जिसमें जेनेरेटिव एआई अगली ट्रांसफॉर्मेटिव फोर्स के रूप में उभर रही है। यह बात कॉग्निजेंट के सीईओ रवि कुमार एस ने टाइम्स ग्रुप के ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट के 8वें संस्करण में कही।

भविष्य को आकार देने में मदद करेगा एआई

ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2024 में, कॉग्निजेंट के सीईओ रवि कुमार एस ने जेनेरेटिव एआई पर जानकारी दी। उन्होंने उद्यमिता के भविष्य को आकार देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। लगभग 20 बिलियन डॉलर के प्रभावशाली राजस्व के साथ फॉर्च्यून 500 कंपनी के रूप में कॉग्निजेंट का कद शिखर पर है।

ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2024 में, रवि कुमार एस ने भारत में कंपनी के महत्वपूर्ण फुटप्रिंट पर प्रकाश डाला, जिसमें देश में स्थित 70% कार्यबल का दावा किया गया, जिससे यह भारत में दूसरा सबसे बड़ा टेक सर्विस इम्प्लॉयर बन गया।

जेनेरेटिव एआई अगली ट्रांसफॉर्मेटिव फोर्स- रवि कुमार

कुमार ने कहा कि टेक सर्विस कंपनियां टेक्नोलॉजी असंतुलन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिसमें जेनेरेटिव एआई अगली ट्रांसफॉर्मेटिव फोर्स के रूप में उभर रही है। उन्होंने आर्थिक समृद्धि लाने की इसकी क्षमता के बारे में आशा जताई है। जिससे एक नए युग की शुरुआत होगी जो सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देते हुए जॉब्स, स्किल और टास्क को फिर से परिभाषित करेगा।

टेक्नोलॉजी से होगा बदलाव

उन्होंने सिलिकॉन वैली से ग्रामीण भारत तक इस टेक्नोलॉजी के बदलाव की कल्पना की, जो उस अभूतपूर्व गति को दर्शाता है जिस पर यह विभिन्न समुदायों तक पहुंच सकती है। कुमार ने टेक्नोलॉजी कर्व की डेवलपिंग प्रकृति को स्वीकार करते हुए निष्कर्ष निकाला है कि इन डेवलपमेंट को आकार देने और उनका लाभ उठाने में मानव भागीदारी की आवश्यकता होगी।

मोबाइल क्रांति का दिया उदाहरण

कुमार ने 1970 के दशक में माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट और उसी समय के आसपास शुरू हुई मोबाइल क्रांति का उदाहरण भी दिया। उन्होंने इन टेक्नोलॉजी बदलावों में धीमी शुरुआत, बाद में तेजी और अंततः स्थिरीकरण के पैटर्न को रेखांकित किया। इस पैटर्न से विचलन की आशंका जताते हुए, कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि जेनरेटिव एआई एक एस कर्व को फॉलो करेगा। कुमार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जेनरेटिव एआई एक यूनीक पैराडिज्म का प्रतिनिधित्व करता है जहां कंप्यूटर इंटरफेस के रूप में नेचुरल लैंग्वेज के साथ, मनुष्यों को समझने की कोशिश करते हैं।

TNN Business Desk
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