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सरकारी टेंडरों में कार्टेल का खेल! HP India पर 138.85 करोड़ का जुर्माना, 21 रीसैलर्स भी फंसे

HP India Penalty: CCI ने GeM टेंडर में कार्टेल और कवर बिडिंग के आरोप में HP India पर 138.85 करोड़ रुपये और 21 रीसैलर्स पर 3.52 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।

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HP India पर जुर्माना

Photo : iStock

HP India Penalty : सरकारी खरीद के लिए इस्तेमाल होने वाले गवर्नमेंट ई मार्केट प्लेस यानी GeM के टेंडरों में कथित तौर पर कार्टेल बनाकर प्रतिस्पर्धा प्रभावित करने के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी CCI ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने दो अलग-अलग मामलों में HP India पर कुल 138.85 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, कंपनी के 21 रीसैलर्स पर कुल करीब 3.52 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। CCI ने संबंधित कंपनियों और उनके अधिकारियों को प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश भी दिया है।

दो मामलों में हुई है बड़ी कार्रवाई

पहला मामला पर्सनल सिस्टम प्रोडक्ट्स की बिक्री और सप्लाई से जुड़ा है। इसमें HP India पर 126.87 करोड़ रुपये और उसके पांच रीसैलर्स पर सामूहिक रूप से करीब 1.22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। CCI के मुताबिक, इस मामले में HP India और पांच रीसैलर्स के बीच कार्टेलाइजेशन पाया गया। दूसरा मामला प्रिंटर हार्डवेयर के साथ इस्तेमाल होने वाले टोनर, कार्ट्रिज और अन्य कंज्यूमेबल्स की सप्लाई से जुड़ा है। इस मामले में HP India पर 11.98 करोड़ रुपये और उसके 16 रीसैलर्स पर सामूहिक रूप से करीब 2.30 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

HP India पर क्या है आरोप?

आयोग की जांच में सामने आया कि पर्सनल सिस्टम प्रोडक्ट्स से जुड़े मामले में HP India रीसैलर्स को बोली की कीमत तय करने के निर्देश दे रही थी। आयोग के मुताबिक, कंपनी GeM टेंडरों में रीसैलर्स की भागीदारी को भी प्रभावित कर रही थी। इसके लिए जरूरत के मुताबिक टेंडर ऑथराइजेशन को रोका या जारी किया जाता था। CCI ने इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3(3)(d) के साथ धारा 3(1) का उल्लंघन माना। इस मामले में CCI ने पांच रीसैलर्स को HP India के साथ मिलीभगत का दोषी पाया। इनमें डेल्फी इन्फोसॉल्यूशंस, डिजिटेक कंप्यूटर्स, ऑर्बिट टेकसोल, हिंद टेक्नोकेयर और कृष्णा कंप्यूटर्स शामिल हैं। आयोग के मुताबिक, ये कंपनियां एचपी इंडिया के साथ मिलकर बोली और टेंडर प्रक्रिया में समन्वय कर रही थीं।

16 रीसैलर्स पर कवर बिडिंग का आरोप

दूसरे मामले में CCI ने HP India के 16 Tier-2 रीसैलर्स को सपोर्ट या कवर बिड दाखिल करने का दोषी पाया। कवर बिडिंग ऐसी व्यवस्था है, जिसमें कुछ कंपनियां जानबूझकर ऐसी बोली दाखिल करती हैं, जिससे वे टेंडर जीतने की वास्तविक प्रतिस्पर्धा में नहीं रहतीं। इसका मकसद पहले से तय कंपनी को टेंडर दिलाने में मदद करना होता है। CCI के मुताबिक, इस मामले में डीडी एंटरप्राइजेज, असेंट इन्फॉर्मेशन, कायपी एंटरप्राइजेज, ब्रिटेक्स एंटरप्राइजेज, अलंकार डिस्ट्रीब्यूटर्स, विजय स्टेशनरी मार्ट, जी आर एंटरप्राइजेज, परफेक्ट इनोवेटिव, खंडेलवाल ट्रेडर्स, ए स्क्वायर टेक्नोलॉजीज, इनोवेटिव सॉल्यूशंस, पायोनियर टेक्नोलॉजीज, डेल्फी इन्फोसॉल्यूशंस, शक्ति मार्केटिंग, इंटरनेशनल कंप्यूटर रिसोर्सेज और आर्म्स पेरिफेरल्स शामिल हैं। आयोग ने HP India को इस कार्टेल व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाने वाला बताया।

अधिकारियों पर भी लगाया जुर्माना

CCI ने सिर्फ कंपनियों को ही जिम्मेदार नहीं माना, बल्कि HP India और संबंधित रीसैलर कंपनियों के अधिकारियों को भी प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 48 के तहत व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने इन अधिकारियों पर भी आर्थिक दंड लगाया है। दोनों मामलों में संबंधित कंपनियों और रीसैलर्स को ऐसी प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों को तत्काल बंद करने और भविष्य में इनसे दूर रहने का निर्देश दिया गया है।

क्या होती है कवर बिडिंग व्यवस्था?

कवर बिडिंग को आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी व्यवस्था है, जिसमें कुछ कंपनियां जानबूझकर ऐसी बोली दाखिल करती हैं, जिससे वे टेंडर जीतने की वास्तविक प्रतिस्पर्धा में नहीं रहतीं। इससे पहले से तय कंपनी के टेंडर जीतने की संभावना बढ़ जाती है और बाहर से देखने पर टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा दिखाई देती है। CCI का यह आदेश सरकारी खरीद में बोली प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने दोनों मामलों में प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत कार्रवाई की है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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