उत्तर प्रदेश में मेरठ से प्रयागराज तक बनाए जा रहे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अनुसार, इस परियोजना का करीब 79 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यह एक्सप्रेसवे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे पर कार्य की गति और विस्तार
यूपीडा के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेसवे का एर्थ वर्क 99 प्रतिशत और ग्रेन्यूलर सब बेस (जीएसबी) का कार्य 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके अलावा, डेंस बिटुमिनस मैकाडम (डीबीएम) का कार्य भी 82 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
अदाणी समूह द्वारा किया जा रहा कार्य
गंगा एक्सप्रेसवे का 464 किलोमीटर लंबा हिस्सा अदाणी समूह द्वारा बनाया जा रहा है। इस परियोजना को तीन हिस्सों में बांटा गया है:
बदायूं से हरदोई तक: 151.7 किलोमीटर
हरदोई से उन्नाव तक: 155.7 किलोमीटर
उन्नाव से प्रयागराज तक: 157 किलोमीटर
अदाणी समूह ने अत्याधुनिक तकनीक और दक्ष इंजीनियरों की टीम के माध्यम से इन खंडों पर तेजी से काम किया है। यह एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन का भी बन सकता है, जिससे यातायात को और अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे की महत्वता और रियायत अवधि
यह परियोजना डीबीएफओटी (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट, ट्रांसफर) मॉडल के तहत बनाई जा रही है और इसे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने की उम्मीद है। इसकी रियायत अवधि 30 वर्ष तय की गई है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-एनसीआर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर स्थित प्रयागराज से जोड़ेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण से राज्य के कई जिलों को सीधे जोड़ने के साथ-साथ परिवहन में सुगमता और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
अदाणी समूह की अन्य परियोजनाएं
अदाणी समूह द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों में लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से 13 सड़क परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। यह समूह देश के विभिन्न हिस्सों में 5,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण कर रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे का सफल निर्माण अदाणी समूह की अवसंरचना प्रबंधन क्षमता और तेज निष्पादन क्षमता का एक और प्रमाण है।
IANS इनपुट के साथ
