GAIL Mumbai-Nagpur Pipeline : देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की गैस परिवहन और विपणन कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने मुंबई-नागपुर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (एमएनपीएल) परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। करीब 694 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन महाराष्ट्र की महत्वाकांक्षी समृद्धि महामार्ग एक्सप्रेसवे के साथ-साथ बिछाई गई है। यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की गई है और इसे देश में पहली बार किसी व्यस्त परिवहन कॉरिडोर के साथ उच्च क्षमता वाली गैस पाइपलाइन के एकीकरण का उदाहरण माना जा रहा है।
सिर्फ तीन मीटर चौड़े कॉरिडोर में बड़ी उपलब्धि
अधिकारियों के अनुसार, इस पाइपलाइन का लगभग 675 किलोमीटर हिस्सा यानी करीब 96 प्रतिशत लंबाई समृद्धि महामार्ग के किनारे मात्र तीन मीटर चौड़ी पट्टी में डाली गई है। आम तौर पर इस तरह की गैस पाइपलाइन के लिए 20 से 30 मीटर तक चौड़ा क्षेत्र चाहिए होता है। इतनी कम जगह में 24 इंच व्यास की उच्च क्षमता वाली गैस लाइन बिछाना एक बड़ी तकनीकी और इंजीनियरिंग उपलब्धि मानी जा रही है। इस काम में महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के साथ करीबी समन्वय किया गया।
उच्च क्षमता और दोतरफा गैस प्रवाह
मुंबई-नागपुर गैस पाइपलाइन की क्षमता लगभग 1.65 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन है। इसमें दोनों दिशाओं में गैस प्रवाह की सुविधा दी गई है, जिससे आपूर्ति अधिक लचीली और भरोसेमंद बनेगी। परियोजना अब लगभग पूरी तरह परिचालन के लिए तैयार है और जल्द ही पूर्ण क्षमता पर काम करने लगेगी।
पश्चिमी घाट में कठिन इंजीनियरिंग चुनौती
इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती पश्चिमी घाट के दुर्गम इलाकों में पाइपलाइन बिछाना रही। खास तौर पर फुगले पहाड़ी क्षेत्र में जमीन की ऊंचाई में 200 मीटर से ज्यादा का अंतर, पथरीली ढलान, घने जंगल और भारी मानसूनी बारिश ने काम को बेहद मुश्किल बना दिया। अधिकारियों ने बताया कि यहां क्षैतिज दिशात्मक ड्रिलिंग (एचडीडी) तकनीक को थ्रस्टर सिस्टम के साथ जोड़कर लगभग एक किलोमीटर लंबी पाइपलाइन को सुरक्षित तरीके से डाला गया। यह तकनीक भारत में अभी बहुत कम इस्तेमाल होती है।
मानसून में भी नहीं रुका काम
भारी बारिश के बावजूद काम जारी रखने के लिए ढलान स्थिरीकरण, बेहतर जल निकासी और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए गए। इससे न सिर्फ परियोजना की गति बनी रही, बल्कि पर्यावरण और आसपास के क्षेत्रों को भी नुकसान नहीं हुआ।
कोविड और वन स्वीकृतियों से हुई देरी
इस परियोजना को मई 2020 में नियामकीय मंजूरी मिली थी, लेकिन कोविड-19 महामारी और महाराष्ट्र के 10 जिलों में करीब 56 किलोमीटर क्षेत्र में वन स्वीकृतियां न मिलने के कारण इसमें देरी हुई। अप्रैल 2023 में वन स्वीकृतियां मिलने के बाद काम में तेजी आई और अब परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है।
महाराष्ट्र के विकास को मिलेगा बड़ा सहारा
मुंबई-नागपुर पाइपलाइन से राज्य के 16 जिलों में शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार होगा। इससे अनुमान है कि करीब 95 लाख घरों को पाइप से रसोई गैस (पीएनजी) कनेक्शन मिलेगा और 1,700 से अधिक सीएनजी स्टेशनों को ईंधन की आपूर्ति हो सकेगी। इसके अलावा बिजली उत्पादन, उर्वरक, रसायन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा। समृद्धि महामार्ग के आसपास छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थापना को भी इससे प्रोत्साहन मिलेगा।
भविष्य की परियोजनाओं के लिए ब्लूप्रिंट
अधिकारियों का कहना है कि तीन मीटर चौड़े कॉरिडोर में इतनी लंबी पाइपलाइन बिछाना इस बात का प्रमाण है कि भारत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी आधुनिक अवसंरचना परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है। यह परियोजना राष्ट्रीय गैस ग्रिड की एक अहम कड़ी है और गति शक्ति ढांचे के तहत भविष्य में बनने वाले बहु-उपयोगी गलियारा प्रोजेक्ट्स के लिए एक मिसाल और ब्लूप्रिंट के रूप में देखी जा रही है।
