मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। युद्ध के कारण होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई रुकने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 40 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया और खबरों में यह सवाल तैर रहा है कि अगर सप्लाई पूरी तरह रुक गई, तो भारत के पास कितने दिन का बैकअप है? आइए, भारत की रोजाना की खपत और स्टॉक के पूरे गणित को समझते हैं।
कितना बड़ा है भारत का 'रिजर्व फंड'?
युद्ध शुरू हुए एक हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है और सप्लाई को लेकर तरह-तरह की रिपोर्ट सामने आ रही हैं। कुछ दावों में कहा गया कि भारत का तेल भंडार जल्द खत्म हो जाएगा, लेकिन सरकार ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार के अनुसार, भारत के पास 64 दिनों का 'स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व' (Strategic Oil Reserve) मौजूद है। इसका मतलब है कि अगर कल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल की बूंद भी न आए, तब भी भारत के पास इतना स्टॉक है कि 64 दिनों तक देश की अर्थव्यवस्था बिना रुके चल सके। यह भंडार जमीन के नीचे बनी विशाल गुफाओं में आपातकाल के लिए सुरक्षित रखा गया है।
रोज कितनी होती है खपत?
भारत दुनिया के सबसे बड़े ईंधन उपभोक्ताओं में से एक है। जनवरी 2026 के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत की रोजाना की मांग चौंकाने वाली है। महीने भर की खपत को अगर हम दिनों में बांटकर देखें, तो तस्वीर साफ हो जाती है कि हमें हर दिन कितने 'काले सोने' की जरूरत पड़ती है।
1. डीजल
भारत में सबसे ज्यादा खपत डीजल की होती है क्योंकि ट्रक, बसें, माल ढुलाई के वाहन और खेती की मशीनें इसी पर निर्भर हैं। जनवरी में देश ने कुल 79.92 लाख मीट्रिक टन डीजल जलाया। यानी भारत में हर दिन करीब 2.57 लाख मीट्रिक टन डीजल का इस्तेमाल होता है। औद्योगिक पहिया और खेती-बाड़ी इसी डीजल के दम पर चलते हैं।
2. पेट्रोल
पेट्रोल की मांग मुख्य रूप से शहरों में चलने वाली कारों और दोपहिया वाहनों से आती है। जनवरी में पेट्रोल की कुल खपत 35.11 लाख मीट्रिक टन रही। इसे रोजाना के औसत में बदलें, तो भारत हर दिन लगभग 1.13 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल डकार जाता है। बढ़ते शहरीकरण और निजी वाहनों की संख्या ने पेट्रोल की मांग को लगातार ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है।
3. LPG
घरेलू रसोई गैस (LPG) की खपत भी कुछ कम नहीं है। जनवरी के दौरान कुल खपत 30.33 लाख मीट्रिक टन रही, जिसका दैनिक औसत लगभग 97.8 हजार मीट्रिक टन बैठता है। देश के करोड़ों घरों में सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक, रसोई का पूरा दारोमदार इसी सप्लाई पर टिका है।
क्या घबराने की जरूरत है?
आंकड़े बताते हैं कि भारत की ऊर्जा जरूरत बहुत विशाल है, लेकिन राहत की बात यह है कि हमारे पास शॉर्ट टर्म (कम समय) के लिए पर्याप्त बैकअप है। भारत केवल गल्फ देशों पर ही निर्भर नहीं है; रूस और अन्य अफ्रीकी देशों से भी तेल का आयात किया जा रहा है ताकि जोखिम को कम किया जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक भंडार के अलावा रिफाइनरियों के पास भी अपना वर्किंग स्टॉक होता है।
