Artificial Intelligence यानी AI अब सिर्फ चैटबॉट या फोटो बनाने तक सीमित नहीं है। गाने बनाने, म्यूजिक तैयार करने, मार्केट रिसर्च, कोडिंग, कानूनी दस्तावेजों के ड्राफ्ट और यहां तक कि खाने-पीने की चीजों की सिफारिश और सप्लाई चेन तक में इसका इस्तेमाल हो रहा है। मानव जीवन का शायद ही कोई पहलू हो, जो अब AI से अछूता है। यही वजह है कि की अब नौकरियों को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।
2024 में अर्थशास्त्र के नोबल विजेता व MIT के प्रोफेसर डारोन ऐसमोग्लू (Daron Acemoglu) ने AI को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर AI के विकास और उसके इस्तेमाल की मौजूदा दिशा नहीं बदली गई, तो अगले दशक में बेरोजगारी कई गुना बढ़ सकती है। उनके मुताबिक सबसे खराब स्थिति में बेरोजगारी तीन गुना तक बढ़ सकती है।
औद्योगिक क्रांति से बहुत तेज AI की रफ्तार
ऐसमोग्लू के मुताबिक AI के साथ जो बदलाव हो रहा है, उसकी रफ्तार असाधारण है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के शुरुआती चरण को व्यापक असर दिखाने में करीब 80 साल लगे थे, जबकि AI से जुड़ा बदलाव सिर्फ 1-2 साल में कई अलग-अलग सेक्टर्स में एक साथ दिखाई दे रहा है। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा चिंतित करती है। क्योंकि इस बार टेक्नोलॉजी सिर्फ कुछ खास तरह के कामों को नहीं बदल रही, बल्कि हर तरह की इंडस्ट्री और मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रहा है। खासतौर पर यह पहली बार है, जब क्रिएटिव, क्रिटिकल थिंकिंग से जुड़े व्हाइट कॉलर जॉब्स को भी चुनौती मिली है।
क्या AI खुद नई नौकरियां पैदा नहीं करेगा?
AI के पक्ष में सबसे बड़ी दलील यही है कि नई टेक्नोलॉजी कुछ पुरानी नौकरियां खत्म करती है, लेकिन नई नौकरियां भी पैदा करती है। उदाहरण के लिए AI ट्रेनिंग एक तेजी से बढ़ रही जॉब कैटेगरी है। Mercor जैसी कंपनियां हजारों फ्रीलांसर को AI मॉडल को अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी सिखाने के लिए काम पर लगा रही हैं। AI Training से जुड़े कुछ फ्रीलांस कामों में $20 से लेकर $200 प्रति घंटे तक भुगतान का भी जिक्र किया गया है। लेकिन Acemoglu का कहना है कि इन नई नौकरियों की संख्या उन लोगों की तुलना में बहुत कम होगी, जिनका काम AI और ऑटोमेशन की वजह से खत्म हो सकता है।
सबसे ज्यादा खतरा किन जॉब्स को?
AI का असर उन जॉब्स पर पहले दिखाई दे रहा है, जिनमें शुरुआती स्तर के कई काम आसानी से ऑटोमेट हो सकते हैं। रिसर्च में AI से ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों, खासकर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट (Software Development) जैसे कामों में युवाओं की हायरिंग कमजोर पड़ने की बात सामने आई है। हाल ही में कॉलेज से निकले युवाओं के लिए भी AI एक्सपोज्ड क्षेत्रों में जॉब्स और वेज ग्रोथ पर दबाव दिखने की बात कही गई है। McKinsey Global Institute के एक विश्लेषण के मुताबिक 2035 तक करीब 1.1 करोड़ अमेरिकी कामगारों को रोजगार के नए विकल्प तलाशने होंगे।
क्या इंसान की क्रिएटिविटी भी खतरे में है?
म्यूजिक प्रोड्यूसर Robbie Hiser का मानना है कि क्रिएटिव फील्ड में इंसानी भूमिका खत्म नहीं होगी। उनका तर्क है कि AI के पास इंसान जैसा लाइफ एक्सपीरिएंस नहीं है। इसी तरह लॉयर्स भी मानते हैं कि AI तैयारी और रिसर्च में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी भरोसे और जजमेंट की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता।
ऐसमोग्लू ने क्या रास्ता बताया?
Acemoglu AI को रोकने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर इस बात पर है कि AI को इस तरह बनाया जाए कि वह इंसानों की क्षमता बढ़ाए, उन्हें रिप्लेस नहीं करे। उनके मुताबिक कंपियां ऐसे AI सिस्टम तैयार कर सकती हैं, जो वर्कर्स को ज्यादा प्रोडक्टिव बनाएं। वहीं, सरकारें टैक्स सिस्टम में ऐसे बदलाव कर सकती है, जिससे कंपनियों को केवल ऑटोमेशन की बजाय लोगों को हायर करने के लिए भी इन्सेंटिव दे सकती हैं। कुल मिलाकर Acemoglu की चेतावनी AI के खिलाफ नहीं, बल्कि AI के इस्तेमाल की दिशा को लेकर है। उनका कहना है कि सवाल यह नहीं है कि AI आएगा या नहीं, बल्कि यह है कि AI इंसानों का काम आसान करेगा या बड़े पैमाने पर इंसानी काम की जगह लेगा।
