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Flexicap Vs Multicap म्यूचुअल फंड: कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न और कहां है कम रिस्क? निवेश से पहले जानें

निवेशक म्यूचुअल फंड को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इनसे अच्छा रिटर्न मिलता है। म्यूचुअल फंड हमें समय के साथ महंगाई से निपटने और लंबे समय में संपत्ति बनाने के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करते हैं।

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निवेश से पहले समझें फ्लेक्सीकैप और मल्टीकैप का फर्क

Flexicap Vs Multicap Mutal Fund: शेयर बाजार में सस्ती का असर म्यूचुअल फंड निवेशकों पर हुआ है। पिछले दो साल में निवेशकों को निगेटिव या मामूली रिटर्न मिला है। हालांकि, इसके बावजूद SIP के जरिये हर महीने हजारों करोड़ रुपये निवेश अलग—अलग म्यूचुअल फंड स्कीम में हो रहा है। निवेशक लॉन्ग टर्म को देखते हुए म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश कर रहे हैं। हालिया बाजार के उतार-चढ़ाव में निवेशकों के बीच मल्टी-कैप फंड और फ्लेक्सी-कैप फंड काफी तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। अब सवाल उठता है कि इन दोनों में कौन बेहतर है? निवेशक को निवेश से पहले किन बातों का ख्याल रखना चाहिए। आइए आपके सभी सवालों के जवाब देते हैं।

मल्टी-कैप फंड का मतलब

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, मल्टी-कैप फंड अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (बाज़ार पूंजीकरण) वाली कंपनियों के इक्विटी और इक्विटी-संबंधित शेयरों के पोर्टफोलियो में अपना पैसा निवेश करते हैं। इसलिए, मल्टी-कैप फंड में लार्ज-कैप, स्मॉल-कैप और मिड-कैप कंपनियों में निवेश किया जा सकता है। मल्टी-कैप फंड कैटेगरी आपकी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से एक अच्छा विकल्प हो सकती है क्योंकि हर स्कीम अलग-अलग प्रतिशत में निवेश करती है।

फ्लेक्सी-कैप फंड का मतलब

SEBI के नोटिफिकेशन के अनुसार, फ्लेक्सी-कैप फंड एक ओपन-एंडेड, डायनामिक इक्विटी स्कीम है। यह किसी भी मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली कंपनियों में निवेश करती है, खासकर लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में। स्कीम की कुल संपत्ति का कम से कम 65% हिस्सा इक्विटी और इक्विटी-संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना जरूरी है।

Multi-Cap Fund vs Flexi-Cap Fund: क्या है अंतर?

पैरामीटरMulti-Cap FundFlexi-Cap Fund
मतलबLarge, Mid और Small Cap में निवेश अनिवार्यकिसी भी Market Cap में निवेश की आजादी
इक्विटी निवेशकम से कम 75%कम से कम 65%
मार्केट कैप नियमLarge, Mid, Small में 25%-25%-25% जरूरीकोई तय अनुपात नहीं
फंड मैनेजर की आजादीसीमित (SEBI नियम लागू)ज्यादा, बाजार के हिसाब से निवेश
जोखिममध्यम से अधिकअपेक्षाकृत कम व लचीला
टैक्सSTCG: 15%, LTCG: ₹1 लाख तक टैक्स फ्री, फिर 10%Multi-Cap जैसा ही
किसके लिए बेहतर?ज्यादा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न चाहने वालेसंतुलित जोखिम और स्थिर निवेश चाहने वाले
निवेश अवधि5–7 सालकम से कम 5 साल
मुख्य फायदासभी कैप में तय निवेश से विविधताबाजार के अनुसार पोर्टफोलियो बदलने की सुविधा

रिस्क और रिटर्न के मामले में क्या अलग?

मल्टी-कैप फंड फिक्स्ड एलोकेशन के साथ लगातार एक्सपोजर देते हैं, जबकि फ्लेक्सी-कैप फंड में रिस्क और रिटर्न फंड मैनेजर के एलोकेशन के आधार पर बदलते रहते हैं। जब इन दोनों फंड कैटेगरी के रिस्क और रिटर्न की बात आती है, तो अंतर इस बात में नहीं होता कि वे किसमें निवेश करते हैं, बल्कि इस बात में होता है कि वे हर सेगमेंट में कितना निवेश करते हैं।

मल्टी-कैप फंड में, स्मॉल-कैप में हमेशा एक फिक्स्ड एक्सपोजर होता है। इसलिए, जहां आपको लगातार डाइवर्सिफिकेशन मिलता है, वहीं आपको स्मॉल-कैप की अस्थिरता (volatility) का भी सामना करना पड़ता है।

दूसरी ओर, फ्लेक्सी-कैप फंड रिस्क को कम या ज्यादा कर सकते हैं। अगर फंड मैनेजर सुरक्षित खेलना चाहता है, तो वे लार्ज-कैप की ओर झुक सकते हैं। अगर उन्हें मौके दिखते हैं, तो वे मिड या स्मॉल-कैप आदि में जा सकते हैं। इसलिए, फ्लेक्सी-कैप फंड में अस्थिरता ज्यादा हो सकती है, और यह वास्तव में किसी भी समय किए गए एलोकेशन पर निर्भर करता है।

कौन सा बेहतर है: मल्टी-कैप या फ्लेक्सी-कैप फंड?

इसका कोई एक जवाब नहीं है। मल्टी-कैप फंड और फ्लेक्सी-कैप फंड में से बेहतर विकल्प आपकी निवेश पसंद पर निर्भर करता है।

पिछले 5 साल में कहां मिला ज्यादा रिटर्न?

समयावधिफ्लेक्सी-कैप फंड (%)मल्टी-कैप फंड (%)
1 साल1.28%3.58%
3 साल13.98%17.07%
5 साल11.99%14.66%

(स्रोत: वैल्यू रिसर्च)

25 जून 2026 तक के वैल्यू रिसर्च (Value Research) के आंकड़ों के अनुसार, मल्टी-कैप फंडों ने Flexi-cap funds के मुकाबले 1, 3 और 5 साल की अवधियों में अधिक रिटर्न दिया है। यह अंतर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है क्योंकि दोनों ही श्रेणियां अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइजेशन (लार्ज, मिड और स्मॉल कैप) में निवेश करती हैं, लेकिन दोनों का एलोकेशन फ्रेमवर्क (पैसा लगाने का ढांचा) बिल्कुल अलग है।

निवेशकों को दोनों में से चुनाव कैसे करना चाहिए?

एक्सपर्ट के अनुसार, निवेश का फैसला हालिया प्रदर्शन को देखने के बजाय इस आधार पर होना चाहिए कि वह फंड आपके पोर्टफोलियो में क्या भूमिका निभाता है। मल्टी-कैप फंडों का हालिया बेहतर प्रदर्शन बाजार के उस दौर को दर्शाता है जिसमें मिड और स्मॉल-कैप शेयरों ने लार्ज-कैप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। चूंकि मल्टी-कैप फंडों के लिए इन सेगमेंट्स में भाग लेना संरचनात्मक रूप से अनिवार्य है, इसलिए उन्हें अधिक लाभ हुआ है। हालांकि, दोनों श्रेणियों के बीच यह अंतर हमेशा ऐसा ही रहेगा, यह जरूरी नहीं है। जैसे ही बाजार का नेतृत्व (Market leadership) बदलेगा, प्रदर्शन में भी बदलाव आ सकता है।

निवेशकों के लिए इसका सीधा सा निष्कर्ष यही है कि मल्टी-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंडों के बीच का चुनाव रिटर्न के पीछे भागने के बारे में नहीं है, बल्कि इस बारे में है कि वे अपने इक्विटी पोर्टफोलियो में किस स्तर का ढांचा (Structure) या लचीलापन (Flexibility) चाहते हैं।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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