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विदेशी निवेशकों ने नहीं रोकी बिकवाली, अप्रैल के 2 दिन में 19,837 करोड़ निकाले, अब आगे क्या?

मार्च में एफपीआई ने घरेलू शेयर बाजार से करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.7 अरब डॉलर) की रिकॉर्ड निकासी की थी। यह एफपीआई की निकासी की दृष्टि से सबसे खराब महीना था।

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विदेशी निवेशक

भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है। मार्च महीने में रिकॉर्ड तोड़ बिकवाली के बाद अब अप्रैल के शुरुआती 2 दिन में विदेशी निवेशकों ने बड़ी बिकवाली कर दी है। बता दें कि अप्रैल के पहले दो कारोबारी सत्रों में ही उन्होंने 19,837 करोड़ रुपये (2.1 अरब डॉलर) के शेयर बेचे हैं। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये में लगातार गिरावट को माना जा रहा है। इससे पहले मार्च में एफपीआई ने घरेलू शेयर बाजार से करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.7 अरब डॉलर) की रिकॉर्ड निकासी की थी। यह एफपीआई की निकासी की दृष्टि से सबसे खराब महीना था।

बाजार में फरवरी में पैसे डाले थे

वहीं एफपीआई ने फरवरी में शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो 17 माह का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, ताजा बिकवाली के बाद 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 1.5 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। एफपीआई ने अप्रैल के दो कारोबारी सत्रों में 19,837 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।

क्यों निकाल रहे हैं और अब आगे क्या?

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि युद्ध जारी रहने, कच्चे तेल के दाम के फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने, रुपये में लगातार गिरावट और डॉलर की मजबूती की वजह से एफपीआई की बिकवाली रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट आई है, और इसमें आगे और कमजोरी की आशंका से भी बिकवाली को बल मिल रहा है।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ने की वजह से निश्चित आय वाली परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है। ऐसे में निवेशक अपने निवेश को शेयरों से अन्य संपत्तियों की ओर संतुलित कर रहे हैं।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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