FII बेच रहे, DII खरीद रहे रुपया कमजोर होने पर भी बाजार ने दिखाई मजबूती
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Dec 7, 2025, 03:30 PM IST
इस हफ्ते शेयर बाजार में एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिला। जहां विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली बाजार को नीचे खींचने की कोशिश कर रही थी, वहीं घरेलू निवेशकों की जबरदस्त खरीदारी ने पूरा माहौल बदल दिया। रुपए की कमजोरी और कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच भी बाजार का मजबूत बने रहना बताता है कि इस समय DII का सपोर्ट बाजार के लिए कितना बड़ा सहारा साबित हो रहा है।
Share Market
भारतीय शेयर बाजार ने इस हफ्ते एक बेहद दिलचस्प तस्वीर पेश की। आमतौर पर जब विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई बाजार में भारी बिकवाली करते हैं, तो इंडेक्स पर तीखा दबाव बनता है और सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट देखी जाती है। लेकिन इस हफ्ते कहानी बिल्कुल उलट रही। रुपए में कमजोरी और ग्लोबल संकेत कमजोर होने के बावजूद बाजार गिरा नहीं, बल्कि मजबूती से टिककर आगे बढ़ा। इसकी वजह थी घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की जोरदार खरीदारी।
FII-DII ने बाजार में कितनी की खरीदारी?
शुरुआती दिसंबर के दिनों में एफआईआई कैश मार्केट में नेट सेलर रहे और उन्होंने कुल 10,401 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है। आमतौर पर इतनी बड़ी सेलिंग बाजार को आसानी से नीचे खींच सकती थी। लेकिन इसी दौरान डीआईआई ने 19,783 करोड़ रुपये की जबरदस्त खरीदारी की, जिसने बाजार को संभाल लिया। डीआईआई की इस आक्रामक खरीद का फायदा यह हुआ कि एफआईआई की भारी बिकवाली का असर बाजार पर ज्यादा नहीं दिखा।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार एफआईआई की सेलिंग का सबसे बड़ा कारण रहा रुपए में कमजोरी। डॉलर के मुकाबले रुपए में करीब 5 पैसे की गिरावट आई है, जिसे विदेशी निवेशक एक नकारात्मक संकेत के रूप में देखते हैं। उनके लिए रुपए की कमजोरी दोहरी मार की तरह होती है एक तो उनके निवेश का मूल्य घटता है, और दूसरा मुनाफा वापस डॉलर में बदलने पर भी नुकसान बढ़ जाता है। इसी वजह से एफआईआई लगातार अपनी पोजिशन काटते हुए नजर आए।
कई सेक्टर ऊंचे स्तर पर
इसके अलावा, मौजूदा समय में भारतीय बाजार कई सेक्टरों में ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। ग्लोबल फंड्स ऐसे समय मुनाफा निकालकर पैसे को उन बाजारों में भेजते हैं जो अपेक्षाकृत सस्ते हैं। इसलिए एनालिस्ट्स मानते हैं कि आने वाले दिनों में भी एफआईआई की कुछ हद तक बिकवाली जारी रह सकती है, खासकर तब जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ेगी।
अब बात करते हैं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की। उनकी रणनीति बिल्कुल अलग है। म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू निवेश संस्थानों में लगातार पैसा आ रहा है। SIP इनफ्लो रिकॉर्ड स्तर पर है, जिससे डीआईआई के पास खरीदारी करने के लिए लगातार फंड उपलब्ध हैं। यह घरेलू निवेशक बाजार को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
साथ ही, देश की अर्थव्यवस्था को लेकर माहौल भी काफी पॉजिटिव है। हाल में आए मजबूत GDP आंकड़ों, घरेलू मांग में तेजी, मैन्युफैक्चरिंग और बैंकिंग सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कॉर्पोरेट आय (Corporate Earnings) में आने वाले महीनों में और सुधार दिख सकता है, जिससे डीआईआई की खरीदारी जारी रहेगी।
इस हफ्ते बाजार के लिए एक और बड़ा सकारात्मक संकेत आया RBI की तरफ से। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट कम कर दिया। साथ ही, उन्होंने यह संकेत भी दिया कि वे बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी सपोर्ट देने के लिए तैयार हैं। जब अर्थव्यवस्था पहले से मजबूत हो और इस पर सेंट्रल बैंक की ओर से अतिरिक्त मदद भी मिल जाए, तो यह निवेशकों की सेंटीमेंट को और मजबूत कर देता है। इसी वजह से इस हफ्ते डीआईआई की खरीद और तेज हुई और इंडेक्स को मजबूती मिली।
आने वाले हफ्तों में बाजार का रुख कैसा रहेगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए एफआईआई की बिकवाली पूरी तरह खत्म नहीं होगी। वे ऊंचे बाजार में प्रॉफिट बुक करते रहेंगे। लेकिन घरेलू स्तर पर मजबूत आर्थिक स्थिति, स्थिर फंड फ्लो और बढ़ती आय के अनुमानों से डीआईआई की खरीदारी जारी रह सकती है। इसका मतलब यह है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में मजबूती बनी रह सकती है और निवेशकों का भरोसा भी कायम रहेगा।
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