Gold-Silver Prices: हाल ही में भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में थोड़ा बदलाव देखने को मिला। इस बदलाव के पीछे Reserve Bank of India (RBI) का बड़ा कदम है, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शुक्रवार (27 मार्च) को लिए गए उस फैसले के बाद आई है, जिसमें उसने डॉलर पर ऑनशोर लॉन्ग पोजिशन्स को सीमित करने का रुख अपनाया था। इससे देश के भीतर ट्रेडर्स और संस्थानों द्वारा बढ़ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगाए जाने वाले दांव सीमित हो जाएंगे। उम्मीद है कि इस कदम से रुपये स्थिर होगी, जो हाल में बार-बार नए निचले स्तरों पर गिरती रही है। इस फैसले का असर तुरंत दिखा और रुपया मजबूत होकर 93.59 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो 27 मार्च के 94.85 के रिकॉर्ड निचले स्तर से करीब 1.3% बेहतर है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डॉलर में पहले जो बड़े निवेश किए गए थे, उन्हें अब कम किया जा रहा है। इससे भी रुपये को मजबूती मिल रही है। हालांकि, यह मजबूती लंबे समय तक टिकेगी या नहीं, इस पर अभी सवाल बना हुआ है। लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने से सोने की कीमतों पर असर पड़ता है। आइए जानते हैं इसका क्या असर पड़ेगा।
सोना-चांदी की कीमतों पर क्या असर
भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ डॉलर-रुपया दर पर भी निर्भर करती हैं। क्योंकि भारत अपनी ज्यादातर जरूरत का सोना विदेशों से आयात करता है और उसकी कीमत डॉलर में तय होती है। सरल शब्दों में समझें तो अगर रुपया मजबूत होता है सोना सस्ता होता है। अगर रुपया कमजोर होता है तो कीमतें बढ़ जाती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर रुपया 95 से मजबूत होकर 93 तक आता है, तो सोने की कीमत में 1,200 से 2,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट हो सकती है।
पहले क्या हुआ था
फरवरी के अंत में, जब रुपया 90.99 प्रति डॉलर था, तब सोने की कीमत करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी। लेकिन मार्च की शुरुआत में रुपया थोड़ा कमजोर होकर 91.29 हुआ, तो सोने की कीमत करीब 5.5% बढ़कर 1.67 लाख रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद रुपया करीब 2.86% कमजोर हुआ। सोना करीब 12% गिरा। चांदी करीब 20% नीचे आई। इससे साफ है कि कीमतों में बदलाव सिर्फ रुपये की वजह से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कारण भी होता है।
गिरावट क्यों होगी अस्थायी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गिरावट केवल करेंसी इफेक्ट के कारण होगी यानी रुपये की मजबूती की वजह से। लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर हालात तनावपूर्ण बने रहते हैं। जैसे भू-राजनीतिक तनाव, निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग और ETF में निवेश तो सोना-चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिलता रहेगा। इसलिए कीमतों में गिरावट ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी।
निवेशकों और ज्वेलर्स के लिए क्या मतलब
रुपये की मजबूती से बाजार में एक अच्छा मौका बन सकता है। निवेशक गिरावट में खरीदारी कर सकते हैं। ज्वेलर्स अपने स्टॉक को बेहतर कीमत पर मैनेज कर सकते हैं। हालांकि, अगर रुपया फिर से कमजोर होता है, तो सोने की कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, RBI के कदम से रुपये को थोड़ी राहत मिली है, जिसका असर सोने की कीमतों पर दिख सकता है। लेकिन यह असर ज्यादा समय तक रहने वाला नहीं है। वैश्विक आर्थिक हालात और कच्चे तेल की कीमतें आगे भी बुलियन बाजार की दिशा तय करेंगी।
