अगर आपका सोना भी बैंक लॉकर में पड़े-पड़े सिर्फ जगह घेर रहा है और आपको उसके बदले कुछ मिलता भी नहीं, तो यह खबर आपके लिए सोने से भी ज्यादा कीमती साबित हो सकती है। आज के समय में 10 ग्राम 24 कैरेट सोना करीब 1.30 लाख रुपये तक पहुंच चुका है, यानी सोना खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं रह गया। ऐसे में अगर आपके पास पहले से सोना मौजूद है और आप चाहें कि वह सिर्फ धूल न खाए, बल्कि आपको हर साल कमाई भी कराकर दे वह भी बिना बेचे और बिना गंवाए, तो सरकार की एक स्कीम आपके लिए खजाना खोल सकती है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं।
भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं बल्कि भावनाओं, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। हर घर में थोड़ा-बहुत सोना जरूर होता है, चाहे वह आभूषण के रूप में हो या सिक्के और बिस्किट के रूप में। लेकिन सच यह है कि हमारे घरों या बैंक के लॉकर में रखा हुआ सोना एक तरह से ‘डेड एसेट’ बनकर रह जाता है जिसका मूल्य तो बढ़ता रहता है, लेकिन उससे कोई कमाई नहीं होती। आज के समय में जब हर निवेशक अपनी हर संपत्ति से बेहतर रिटर्न चाहता है, तो सोने को सिर्फ अलमारी या लॉकर में बंद रखना समझदारी नहीं है। अच्छी बात यह है कि बिना सोना बेचे भी उससे नियमित कमाई पाने के तरीके मौजूद हैं। इसी दिशा में सरकार की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है।
यह सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसके तहत आप अपने सोने को बैंक में जमा करके उस पर ब्याज कमा सकते हैं। मतलब, जो सोना अभी सिर्फ लॉकर में पड़ा हुआ है और जिस पर आप सुरक्षा शुल्क भी देते हैं, वही सोना आपकी कमाई का जरिया बन सकता है। आप अपने सोने के गहने, सिक्के या गोल्ड बिस्किट बैंक में जमा करते हैं और बैंक इनके बदले आपको वार्षिक 2.25% से 2.5% तक ब्याज देता है। यह ब्याज आप नकद या सोना दोनों तरह से ले सकते हैं।
हालांकि मार्च 2025 से इस स्कीम में कुछ बदलाव किए गए हैं। अब मीडियम और लॉन्ग-टर्म डिपॉजिट के विकल्प बंद कर दिए गए हैं, लेकिन 1 से 3 साल की शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट स्कीम अभी भी चालू है। इसका मतलब है कि आप कम अवधि के लिए अपना सोना जमा कर नियमित रिटर्न पा सकते हैं।
लॉकर में पड़े सोने से न तो ब्याज मिलता है, उल्टा बैंकों को लॉकर चार्ज भी देना पड़ता है। ऐसे में GMS एक बेहतर विकल्प है जहां आपका सोना सुरक्षित भी रहता है और उससे कमाई भी होती है।
बहुत बार अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है जैसे मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, या बिजनेस में नुकसान। ऐसी स्थिति में कई लोग तुरंत सोना बेचने का फैसला कर लेते हैं। लेकिन यह अक्सर भावनात्मक और घाटे वाला फैसला साबित होता है, खासकर अगर वह सोना पुश्तैनी हो।
ऐसी स्थिति में सोना बेचने की बजाय गोल्ड लोन एक समझदारी भरा विकल्प होता है। इसमें आप अपना सोना बैंक या एनबीएफसी के पास गिरवी रखकर तुरंत पैसा ले सकते हैं। ज्यादातर संस्थान आपके सोने की बाजार कीमत का 85% तक लोन देते हैं। यदि राशि 5 लाख से ज्यादा है, तो यह सीमा 75% भी हो सकती है।सबसे बड़ी बात आपका सोना बैंक में सुरक्षित रहता है और आप EMI चुकाकर इसे वापस हासिल कर सकते हैं। यह सोना हमेशा के लिए बेच देने से कहीं बेहतर विकल्प है।
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कुछ लोग विकल्पों में न पड़कर सोना बेचना ही चाहें तो इसमें भी सावधानी जरूरी है। जब आप सोना खरीदते हैं, खासकर ज्वेलरी, तो आप उसकी कीमत के साथ-साथ मेकिंग चार्ज, प्रीमियम और GST भी देते हैं। यह मिलाकर कुल लागत 10% से 25% तक बढ़ जाती है। लेकिन बेचते समय यह पूरा पैसा वापस नहीं मिलता। इसलिए मुनाफा कमाने के लिए जरूरी है कि आप सोना तब बेचें, जब बाजार का भाव आपके खरीद मूल्य और मेकिंग चार्ज दोनों से ऊपर चला जाए।
जल्दबाजी में, त्योहारों के तुरंत बाद या भाव स्थिर होने पर बेचना अक्सर सही निर्णय नहीं होता। बाजार की चाल को समझना और सही समय का इंतजार करना जरूरी है।