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USFDA: तीन प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों ने अमेरिकी बाजार से अपनी दवाएं वापस मंगाई, जानें किस काम आती हैं

Dr Reddy's, Sun Pharma: दवा बनाने वाली कंपनियां डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा और अरबिंदो फार्मा उत्पादन संबंधी मुद्दों के कारण अमेरिकी बाजारों से अपनी दवाएं वापस मंगा रही हैं। इसके तहत कई अहम बीमारियों की दवाएं कंपनियों द्वारा रिकॉल की जा रही हैं।

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यूएसएफडीए का एक्शन

Dr Reddy's, Sun Pharma:दवा बनाने वाली कंपनियां डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा और अरबिंदो फार्मा उत्पादन संबंधी मुद्दों के कारण अमेरिकी बाजारों से अपनी दवाएं वापस मंगा रही हैं।यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज जेवीगेटर (सैप्रोप्टेरिन डाइहाइड्रोक्लोराइड) पाउडर फॉर ओरल सॉल्यूशन (100 मिलीग्राम) को वापस ले रही है।सैप्रोप्टेरिन डाइहाइड्रोक्लोराइड का उपयोग हाइपरफेनिलएलनिनमिया (HPA) के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अलावा सन फार्मा एम्फोटेरिसिन बी लिपोसोम की 11,016 बोतलों को वापस ले रही है। इसका उपयोग फंगल संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है। वहीं अरबिंदो फार्मा अमेरिकी बाजार से क्लोराज़ेपेट डिपोटेशियम टैबलेट (3.75 मिलीग्राम और 7.5 मिलीग्राम) की 13,605 बोतलें वापस मंगा रही है।

क्या है मामला

डॉ. रेड्डीज की दवा जेवीगेटर (सैप्रोप्टेरिन डाइहाइड्रोक्लोराइड) पाउडर फॉर ओरल सॉल्यूशन (100 मिलीग्राम) का उपयोग रक्त में फेनिलएलनिन की बढ़ी हुई मात्रा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यूएसएफडीए के अनुसार, कंपनी ने आठ अप्रैल से अमेरिका के बाजार से दवाओं को वापस लेना शुरू किया। इसके अलावा कंपनी सैप्रोप्टेरिन डाइहाइड्रोक्लोराइड की अतिरिक्त खेप भी वापस मंगा रही है।

इसी तरह सन फार्मा एम्फोटेरिसिन बी लिपोसोम की 11,016 बोतलों को वापस ले रही है। इसका उपयोग फंगल संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है।कंपनी ने 19 अप्रैल से दवाओं को वापस लेना शुरू किया। वहीं अरबिंदो फार्मा अमेरिकी बाजार से क्लोराज़ेपेट डिपोटेशियम टैबलेट (3.75 मिलीग्राम और 7.5 मिलीग्राम) की 13,605 बोतलें वापस मंगा रही है। क्लोराज़ेपेट डिपोटेशियम टैबलेट का उपयोग चिंता, तनाव आदि के इलाज के लिए किया जाता है।यूएसएफडीए के अनुसार, रंग बदलने व इस पर बिंदीदार और पीले धब्बे के कारण इन गोलियों को 24 अप्रैल से वापस लिया जा रहा है।

सिप्ला और ग्लेनमार्क ने भी मंगाई दवाएं

इसके अतिरिक्त, यूएसएफडीए के मुताबिक एफडीसी लिमिटेड टिमोलोल मैलेट ऑप्थेलमिक सॉल्यूशन की 382,104 यूनिट को बाजार से वापस लिया जा रहा है। इसका उपयोग ग्लूकोमा के इलाज के लिए किया जाता है। बताया जा रहा है कि दवा के डिब्बे मानक के अनुरूप नहीं थे।गौरतलब है कि इस माह के शुरू में दवा कंपनी सिप्ला और ग्लेनमार्क ने भी उत्पादन संबंधी मुद्दों के कारण अमेरिकी बाजार से अपने उत्पाद वापस ले लिए थे।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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