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Dollar Vs Rupee: 1 डॉलर की कीमत 90 रुपये से अधिक हुई, जानें आज कितनी टूटी इंडियन करेंसी?

Dollar Vs Rupee: करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि विदेशी फंड की लगातार निकासी और इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की मजबूत डिमांड के कारण रुपये में गिरावट जारी है। 2025 में, करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 5% कमजोर हुई, जो 2022 के बाद इसका सबसे कमजो सालाना प्रदर्शन है। डॉलर के कमजोर होने और ज्यादातर ग्लोबल करेंसी में बढ़ोतरी के बावजूद, रुपया अभी भी पीछे रहा। अगले फाइनेंशियल ईयर में रुपया लगभग 2% गिरेगा, और एक्सचेंज रेट अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के आसपास रहेगा।

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डॉलर के मुकाबले रुपया

Dollar Vs Rupee: अमेरिका-वेनेजुएल संकट ने भारतीय रुपये पर दबाब बढ़ा दिया है। इसके चलते सप्ताह के पहले दिन रुपये में गिरावट है। रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में चार पैसे टूटकर 90.24 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप से उत्पन्न भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने अमेरिकी मुद्रा की मांग को बढ़ावा दिया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से रुपये में गिरावट आने के आसार हैं हालांकि कच्चे तेल की कम कीमतें कुछ हद तक राहत प्रदान कर सकती हैं।

टूटकर खुला भारतीय रुपया

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.21 पर खुला। शुरुआती कारोबार में और टूटकर 90.24 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपया शुक्रवार को 22 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.20 पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.50 पर रहा।

घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 135.81 अंक टूटकर 85,626.20 अंक पर जबकि निफ्टी 25.75 अंक फिसलकर 26,302.80 अंक पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60.70 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को लिवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 289.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

अमेरिका से ट्रेड डील पर सभी की नजर

1-महीने के नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड ने रुपये के लिए मामूली बढ़त या सपाट शुरुआत का संकेत दिया। एनालिस्टों ने बताया कि कॉर्पोरेट डॉलर की मांग ज्यादा बनी हुई है, जबकि एक्सपोर्टर्स द्वारा हेजिंग सीमित है, जिससे स्थानीय करेंसी पर दबाव बना हुआ है। मार्केट के जानकारों ने कहा कि जब तक अमेरिका-भारत संभावित व्यापार समझौते पर कोई प्रगति नहीं दिखती, तब तक करेंसी पर दबाव बना रह सकता है। निवेशक इस हफ्ते अमेरिका के अहम मैक्रोइकोनॉमिक डेटा पर भी नज़र रखेंगे, जो फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी को प्रभावित कर सकता है और करेंसी की चाल पर और असर डाल सकता है। मजबूत डॉलर की मांग और कम सप्लाई वाले चुनौतीपूर्ण हफ्ते के बाद, रुपये के लिए RBI का दखल एक अहम फैक्टर बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 26 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में देश का फॉरेक्स रिज़र्व $3.293 बिलियन बढ़कर $696.61 बिलियन हो गया।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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