बिजनेस

पोर्टफोलियो में है HDFC Bank का शेयर, Jefferies ने किया बड़ा बदलाव, जानें आपके लिए क्या मतलब?

जेफरीज का 'ग्रीड एंड फियर' नोट विशेष महत्व रखता है। जेफरीज के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वुड ने अपने केवल-लॉन्ग इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो में बदलाव का नया दौर शुरू किया है, जिसमें तीन कंपनियों को बाहर निकाला गया है।

Image

एचडीएफसी बैंक शेयर

अगर आपके पोर्टफोलियो में HDFC Bank और PolicyBazaar का स्टॉक है तो यह खबर आपके लिए है। दिग्गज ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी जेफरीज ने अपने निवेश के तरीके में कुछ बदलाव कर रही है। ब्रोकरेज फर्म ने भारत पर केंद्रित अपने 'लॉन्ग-ओनली इक्विटी पोर्टफोलियो' में फेरबदल किया है। इस फेरबदल के तहत HDFC बैंक और पॉलिसीबाजा को हटाकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) और लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस को शामिल किया गया है। इसके अलावा REC की जगह बजाज फाइनेंस को शामिल किया है और 'एटरनल' (Eternal) में अपना निवेश बढ़ाया है, जबकि भारती एयरटेल में निवेश कम किया है। ये बदलाव ऐसे समय में किए गए हैं जब विदेशी निवेश में कुछ सुधार दिख रहा है और घरेलू संकेतकों, खासकर बैंक क्रेडिट ग्रोथ में मजबूती बनी हुई है।

जेफरीज के हालिया स्टॉक चयन के पीछे क्या वजह?

जेफरीज ने 'इंडिया लॉन्ग-ओनली पोर्टफ़ोलियो' में HDFC बैंक और PolicyBazaar की जगह MCX और Lenskart Solutions को शामिल किया जा रहा है। इस कदम के पीछे जेफरीज की MCX पर हालिया रिसर्च भी एक वजह है। दूसरी वजह, जेफरीज भारत की घरेलू विकास कहानी पर अपना दांव और बढ़ा रहा है। ब्रोकरेज की जून 2026 तिमाही नतीजों की रिपोर्ट में एक्सचेंज के बारे में अपनी राय के समर्थन में "प्रोडक्ट और पैठ बनाने के मौकों" को अहम वजह बताया गया है। वहीं, Lenskart इस पोर्टफोलियो को भारत के बढ़ते ऑर्गनाइज़्ड आईवियर मार्केट में हिस्सेदारी दिलाता है। ब्रोकरेज REC को हटा रही है और बजाज फाइनेंस को शामिल कर रही है। दिसंबर 2022 में पोर्टफोलियो में शामिल किए जाने के बाद से REC ने रुपये के हिसाब से 228% की बढ़त हासिल की है। वहीं, जनवरी 2024 में पोर्टफोलियो से हटाए जाने के बाद से बजाज फाइनेंस में 49% की बढ़त हुई है। इससे पहले, जेफरीज ने मई 2015 से मार्च 2020 तक पांच साल के लिए अपने 'एशिया एक्स-जापान लॉन्ग-ओनली' पोर्टफोलियो में इस स्टॉक को रखा था, जिस दौरान इसमें 551% की बढ़त हुई थी।

निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने?

इन्वेस्टर्स के लिए सबसे अहम बात स्टॉक चुनने में आया बदलाव है। जेफरीज MCX, लेन्सकार्ट और बजाज फाइनेंस में अपना पैसा लगा रहा है और साथ ही 'इटर्नल' (Eternal) में अपना एक्सपोजर बढ़ा रहा है, जबकि वह अपनी कुछ पुरानी होल्डिंग्स को कम कर रहा है या उनसे बाहर निकल रहा है। यानी जिन स्टॉक को जेफरीज अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रहा है, उसमें आने वाले समय में तेजी आ सकती है। वहीं, जिसे बाहार कर रहा है, उसमें सुस्ती देखने को मिल सकती है।

एशिया में भारत पसंदीदा विकल्प

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब वुड (Wood) जापान को छोड़कर एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत को अपने पसंदीदा बाज़ार के रूप में लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने 11.4% के बेंचमार्क वेट की तुलना में 12% का वेटेज दिया है, जो एक मामूली लेकिन जानबूझकर दिया गया ओवरवेट है। यह भरोसा ठोस आंकड़ों पर आधारित है। बैंक क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) तेजी से बढ़कर 17-18% के दायरे में पहुंच गई है, जो एक दशक से अधिक समय में सबसे तेज रफ्तार है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

और पढ़ें
End of Article