अगर आप भी अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है, नया बिजनेस शुरू करना जितना रोमांचक होता है, उसे चलाना उतना ही मुश्किल। कई बार लोग एक बेहतरीन आइडिया के साथ मैदान में उतरते हैं, लेकिन फाइनेंशियल मैनेजमेंट की समझ न होने के कारण जल्द ही उनका गणित बिगड़ जाता है और गाढ़ी कमाई डूब जाती है। बिजनेस सिर्फ सामान बेचने का नाम नहीं है, बल्कि नंबरों के खेल को समझने की कला है। अगर आप भी अपना स्टार्टअप या छोटा व्यापार शुरू करने जा रहे हैं, तो इन 6 बिजनेस टर्म्स को समझना आपके लिए जरुरी है। इनके बिना आप कभी यह नहीं जान पाएंगे कि आपका बिजनेस असल में मुनाफा कमा रहा है या सिर्फ आपकी मेहनत और पैसा बर्बाद हो रहा है।
1. ROI और ROCE
सबसे पहले आपको ROI (Return on Investment) को समझना होगा। यह बताता है कि आपने जितना पैसा किसी काम में लगाया, उसके बदले आपको कितना प्रतिशत मुनाफा मिला। उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹100 विज्ञापन पर खर्च किए और उससे ₹150 का मुनाफा हुआ, तो आपका ROI 50% है। वहीं ROCE (Return on Capital Employed) इससे एक कदम आगे की चीज है। यह बताता है कि बिजनेस में लगाई गई कुल पूंजी (पूंजी + कर्ज) का उपयोग कंपनी कितनी कुशलता से मुनाफा कमाने के लिए कर रही है। जिस बिजनेस का ROCE ज्यादा होता है, उसे निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और बेहतर माना जाता है।
2. ROAS
आज के डिजिटल दौर में ROAS (Return on Ad Spend) को जाने बिना विज्ञापन देना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है। यह विशेष रूप से बताता है कि आपने विज्ञापन पर खर्च किए गए प्रति रुपये पर कितना राजस्व (Revenue) कमाया। यदि आपका ROAS कम है, तो इसका मतलब है कि आपकी मार्केटिंग रणनीति गलत है और आप पैसे जला रहे हैं। सफल बिजनेस वही है जो कम खर्च में ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुँचे और बेहतरीन ROAS जनरेट करे।
3. वर्किंग कैपिटल
बिजनेस शुरू करने के लिए सिर्फ एक बार पैसा लगाना काफी नहीं होता, उसे रोज चलाने के लिए भी पैसों की जरूरत होती है। इसे ही Working Capital कहते हैं। Net Working Capital का मतलब है आपकी चालू संपत्ति (Current Assets) और चालू देनदारियों (Current Liabilities) के बीच का अंतर। इसके साथ ही Working Capital Ratio यह दर्शाता है कि क्या आपके पास अल्पावधि के कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी है। अगर यह रेशियो 1 से कम है, तो समझ लीजिए कि आपका बिजनेस कभी भी फंड की कमी के कारण बंद हो सकता है।
4. प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin)
ज्यादातर लोग रेवेन्यू और प्रॉफिट के बीच उलझ जाते हैं। Gross Profit Margin वह है जो सामान बनाने की लागत घटाने के बाद बचता है, लेकिन असली खेल Net Profit Margin में छिपा है। नेट प्रॉफिट वह पैसा है जो टैक्स, किराया, सैलरी और अन्य सभी खर्चे निकालने के बाद आपकी जेब में बचता है। अक्सर लोग भारी रेवेन्यू देखकर खुश होते हैं, लेकिन उनका नेट प्रॉफिट मार्जिन इतना कम होता है कि अंत में उनके हाथ कुछ नहीं लगता। एक स्वस्थ नेट मार्जिन ही बिजनेस को लंबे समय तक टिकाए रखता है।
5. EBITDA
EBITDA (Earnings Before Interest, Tax, Depreciation, and Amortization) किसी भी कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉरमेंस मापने का सबसे सटीक तरीका है। यह बताता है कि ब्याज, टैक्स और मशीनों की घिसाई (Depreciation) जैसे खर्चों से पहले बिजनेस ने अपने कोर काम से कितना पैसा कमाया। निवेशक अक्सर कंपनी की वैल्यूएशन तय करने के लिए EBITDA देखते हैं क्योंकि यह कंपनी की कैश कमाने की असली क्षमता को दर्शाता है।
6. RRR (Run Rate Revenue)
अंत में आता है Revenue और RRR (Run Rate Revenue)। रेवेन्यू का मतलब है कुल बिक्री, लेकिन RRR भविष्य का अनुमान लगाने में मदद करता है। मान लीजिए आपने मार्च महीने में ₹1 लाख की बिक्री की, तो आपका सालाना रन रेट (RRR) ₹12 लाख माना जाएगा। यह आपको यह समझने में मदद करता है कि अगर आप इसी रफ्तार से आगे बढ़े, तो साल के अंत तक आप कहाँ पहुँचेंगे। बिना इन आंकड़ों के आप कभी भी अपने बिजनेस का विस्तार (Scaling) नहीं कर पाएंगे।
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