बिजनेस

Direct Stock या Mutual Fund, Gen-Z की कमाई के लिए क्या है बेस्ट ऑप्शन?

करियर की शुरुआत कर रहे Gen-Z युवाओं के लिए सीधे शेयरों में निवेश करना रोमांचक तो है, लेकिन Mutual Fund एक्सपर्ट मैनेजमेंट और SIP के चलते ज्यादा सुरक्षित और आसान रास्ता माना जाता है।

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Mutual Fund

आज के दौर में जेन-जी (Gen-Z) और युवा वर्किंग प्रोफेशनल्स के बीच कमाई करने और पैसे को सही जगह निवेश करने का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ा है। कॉलेज की पढ़ाई खत्म करते ही या पहली नौकरी लगते ही हर युवा का सपना होता है कि वह जल्द से जल्द अपनी वेल्थ क्रिएट करे। लेकिन निवेश की शुरुआत करते समय उनके सामने सबसे बड़ा और उलझाने वाला सवाल यह आता है कि पैसा सीधे शेयर बाजार (Direct Stock Investing) में लगाया जाए या फिर म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) के रास्ते निवेश किया जाए? दोनों ही रास्तों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। युवाओं के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि उनके कमर्शियल गोल्स, रिस्क लेने की क्षमता और समय के हिसाब से इन दोनों में से कौन सा विकल्प उनके लिए 'बेस्ट' साबित होगा।

डायरेक्ट स्टॉक में क्या है बेनिफिट?

सीधे शेयरों में निवेश करने यानी डायरेक्ट स्टॉक इन्वेस्टिंग का मतलब है कि आप खुद रिसर्च करते हैं, अपनी पसंद की कंपनी चुनते हैं और सीधे उसके शेयर्स खरीदते हैं। जेन-जी के लिए यह विकल्प बहुत रोमांचक होता है क्योंकि इसमें उन्हें किसी कंपनी का आंशिक मालिक बनने का अहसास होता है। अगर आपकी चुनी हुई कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है, तो आपको बहुत कम समय में उम्मीद से कहीं ज्यादा बंपर रिटर्न मिल सकता है। सोशल मीडिया और रील्स के इस दौर में कई युवा सीधे स्टॉक्स की तरफ आकर्षित होते हैं क्योंकि यहां उन्हें अपनी किस्मत आजमाने और तुरंत बड़ा मुनाफा कमाने का मौका दिखता है। लेकिन इस रास्ते में एक बड़ा जोखिम भी छिपा है। सीधे स्टॉक में निवेश करने के लिए आपको शेयर बाजार की गहरी समझ, कंपनियों की बैलेंस शीट पढ़ने का हुनर और लगातार मार्केट पर नजर रखने के लिए काफी समय चाहिए होता है। अगर आपके पास इस रिसर्च के लिए वक्त या सही जानकारी नहीं है, तो एक गलत फैसला आपकी गाढ़ी कमाई को पल भर में डूबा सकता है।

म्यूचुअल फंड क्यों है बेस्ट?

दूसरी तरफ, म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) उन युवाओं के लिए एक बेहद सुरक्षित और समझदारी भरा रास्ता माना जाता है जो नौकरी की शुरुआत कर रहे हैं। म्यूचुअल फंड में आपको खुद रिसर्च करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि आपके पैसे को मैनेज करने का काम 'फंड मैनेजर्स' नाम के मार्केट एक्सपर्ट्स करते हैं। वे आपके पैसे को किसी एक कंपनी में लगाने के बजाय कई अलग-अलग सेक्टर्स और दर्जनों कंपनियों में निवेश कर देते हैं। इसे फाइनेंस की भाषा में 'डाइवर्सिफिकेशन' कहते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगर एक कंपनी डूबती भी है, तो दूसरी कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन से आपका नुकसान कवर हो जाता है और आपका रिस्क बहुत कम हो जाता है। इसके अलावा, जेन-जी के लिए म्यूचुअल फंड में 'एसआईपी' (SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए निवेश करना सबसे आसान है, जहां वे हर महीने अपनी सैलरी से 100 या 500 जैसी छोटी रकम से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें उन्हें रोज-रोज मार्केट के उतार-चढ़ाव को देखकर तनाव लेने की जरूरत नहीं पड़ती।

दोनों में से क्या है बेस्ट?

तो अब सवाल उठता है कि एक युवा प्रोफेशनल के लिए बेस्ट रास्ता कौन सा है? इसका सीधा जवाब यह है कि अगर आप अभी-अभी कमाना शुरू कर रहे हैं, आपके पास बाजार को गहराई से समझने का समय नहीं है और आप अपनी नौकरी पर ध्यान देना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड (विशेषकर इक्विटी म्यूचुअल फंड या इंडेक्स फंड) आपके लिए सबसे बेहतरीन और तनावमुक्त रास्ता है। यह आपको लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग के जरिए एक बड़ा फंड बनाने में मदद करेगा। हालांकि, अगर आपको शेयर बाजार में गहरी दिलचस्पी है, आप कंपनियों के बिजनेस मॉडल को पढ़ना जानते हैं और थोड़ा ज्यादा रिस्क ले सकते हैं, तो आप अपनी कुल निवेश राशि का एक छोटा हिस्सा (जैसे 10 से 20 प्रतिशत) डायरेक्ट स्टॉक्स में लगा सकते हैं। शुरुआत हमेशा म्यूचुअल फंड से करें और जैसे-जैसे आपका अनुभव और समझ बढ़े, तब सीधे शेयरों की दुनिया में कदम रखें।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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