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विदेशी निवेशकों के मंसूबों पर DII ने फेरा पानी, ₹3 लाख करोड़ की खरीदारी कर संभाला बाजार

विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय बाजार से 2 लाख करोड़ की बिकवाली की है। लेकिन, DII ने इस दौरान 3 लाख करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभाला। DII की खरीद के बिना बाजार काफी ज्यादा गिर सकता था।

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FII की बिकवाली के सामने टिके रहे DII

DII Investment in Indian Stock Market 2026: विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूत सहारा दिया है। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही DIIs ने भारतीय इक्विटी बाजार में ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश कर दिया है। इसमें म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, बैंक और रिटायरमेंट फंड शामिल हैं।

हर महीने बाजार में आया भारी पैसा

मंथ-वाइज आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में ₹69,220 करोड़, फरवरी में ₹39,702 करोड़, मार्च में रिकॉर्ड ₹1.4 लाख करोड़, अप्रैल में ₹43,892 करोड़ और मई में अब तक ₹14,204 करोड़ का निवेश हुआ है। यानी बाजार में लगातार घरेलू पैसा आता रहा, जबकि दूसरी तरफ विदेशी निवेशक बिकवाली करते रहे।

FII बिकवाली के बीच DIIs बने बाजार की ढाल

2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सेकेंडरी मार्केट से करीब ₹2 लाख करोड़ निकाल चुके हैं। अमेरिका-ईरान-इजराइल तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और फिस्कल दबाव की चिंता बढ़ी है। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर कायम है। हालांकि इतनी भारी DII खरीदारी के बावजूद बाजार दबाव में बना हुआ है। साल 2026 में अब तक Sensex और Nifty करीब 8.5% टूट चुके हैं। इससे संकेत मिलता है कि रिटेल निवेशक, HNI, PMS, AIF फंड और प्रोप ट्रेडिंग डेस्क की तरफ से बड़ी बिकवाली देखने को मिली है।

DII हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर

मार्च 2026 तक भारतीय बाजार में DII की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 20.9% पर पहुंच गई है। यह सालाना आधार पर 170 बेसिस पॉइंट और तिमाही आधार पर 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी है। DIIs ने खासतौर पर प्राइवेट बैंक, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और NBFC-लेंडिंग सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। वहीं EMS, NBFC नॉन-लेंडिंग और मेटल सेक्टर में हिस्सेदारी घटी है। दूसरी तरफ FII हिस्सेदारी मार्च 2025 के 18.9% से घटकर मार्च 2026 में 17.1% रह गई।

SIP और NPS से मिल रहा लगातार सपोर्ट

एनालिस्टों का कहना है कि निवेशकों को भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है, इसलिए घरेलू फ्लो मजबूत बना हुआ है। हालांकि बड़े बुल रन के लिए DII और FII दोनों का साथ जरूरी है। फिलहाल, हर महीने SIP, NPS और EPFO के जरिए ₹70,000-80,000 करोड़ का लगभग फिक्स फ्लो बाजार में आ रहा है। जब तक बड़े पैमाने पर रिडेम्प्शन नहीं होता, तब तक DII निवेश मजबूत बना रह सकता है।

2024 और 2025 में भी रिकॉर्ड खरीदारी

यह ट्रेंड सिर्फ 2026 तक सीमित नहीं है। DIIs ने 2025 में रिकॉर्ड ₹7.75 लाख करोड़ और 2024 में ₹5.23 लाख करोड़ का निवेश किया था। इसके मुकाबले 2022 में ₹2.76 लाख करोड़ और 2023 में ₹1.82 लाख करोड़ का निवेश हुआ था। घरेलू निवेशकों की यह बढ़ती ताकत बताती है कि भारतीय निवेशकों का रुझान अब फिजिकल एसेट्स से हटकर फाइनेंशियल एसेट्स, खासकर म्यूचुअल फंड और इक्विटी निवेश की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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