भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को शुरुआती अस्थिरता के बाद दोपहर के सत्र में तेज गिरावट देखने को मिली। बैंकिंग, फाइनेंशियल और आईटी शेयरों में गिरावट के चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी पकड़ खो दी। 1:30 बजे तक, बीएसई सेंसेक्स 740.82 अंक की गिरावट के साथ 80,632.93 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी 187.65 अंक टूटकर 24,528.95 पर आ गया। सभी निफ्टी सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में वोलैटिलिटी (अस्थिरता) बढ़ गई।
किन स्टॉक्स ने खींचा बाजार को नीचे?
सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, फाइनेंस और आईटी शेयरों पर देखा गया। इन प्रमुख शेयरों में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
- बजाज फिनसर्व
- एक्सिस बैंक
- बजाज फाइनेंस
- एचडीएफसी बैंक
- आईसीआईसीआई बैंक
- टीसीएस (TCS)
वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में भी गिरावट देखी गई। इसका कारण Wall Street Journal की रिपोर्ट है जिसमें अडानी समूह की इकाइयों और ईरानी एलपीजी शिपमेंट्स के बीच संभावित संबंध का दावा किया गया है।
क्यों दिखी बाजार में इतनी अस्थिरता?
आज के ट्रेडिंग सत्र में अस्थिरता के पीछे कई कारण रहे:
1. देश में कोविड-19 मामलों में वृद्धि
2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक को लेकर बढ़ती उम्मीदें
3. अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़े जोखिम
विशेषज्ञ की राय
डॉ. वी. के. विजयकुमार, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट, Geojit Financial Services ने कहा कि “MPC बैठक में 8 जून को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की उम्मीद है, जिससे रेट सेंसिटिव सेक्टर्स (जैसे ऑटो, रियल एस्टेट) को आने वाले दिनों में फायदा मिल सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा समय में बाजार कंसॉलिडेशन फेज में है, जिसमें "बाय ऑन डिप्स" की रणनीति कारगर साबित हो रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बाजार में सबसे बड़ी चिंता ब्रॉडर मार्केट की ऊंची वैल्यूएशन है। “हालांकि, रिटेल निवेशकों का लंबी अवधि तक बाजार में बने रहना और फंड फ्लो की मजबूती यह संकेत देती है कि भारतीय इक्विटी बाजार ऊंचे वैल्यूएशन पर लंबे समय तक टिके रह सकते हैं।”
डिस्क्लेमर : यहां शेयर बाजार में निवेश की सलाह नहीं दी गई है। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
