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Darjeeling Tea Price: दार्जिलिंग चाय की चुस्की पड़ेगी महंगी, सूखे ने बिगाड़ा स्वाद, 15 फीसदी तक बढ़ गए दाम

Darjeeling Tea Price: अपने स्वाद के लिए फेमस दार्जिलिंग चाय के उत्पादन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। पहाड़ियों पर छह महीने से सूखा पड़ने के कारण फसल का उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब आधा हो गया है। जिसकी वजह से कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।

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महंगी हुई दार्जिलिंग चाय (तस्वीर-Canva)

Darjeeling Tea Price: दार्जिलिंग चाय देश ही नहीं दुनिया भर में फेमस है। इसकी गुणवत्ता का जोर नहीं है। लेकिन इसकी कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई। इसकी वजह सूखे को बताया जा रहा है। पहाड़ियों पर छह महीने से सूखा पड़ने के कारण फसल का उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब आधा हो गया है। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक चाय बागान मालिकों ने कहा कि लंबे समय से बारिश नहीं होने की वजह से अप्रैल-मई में बाजार में आने वाली प्रीमियम फर्स्ट फ्लश चाय के उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।

फर्स्ट फ्लश चाय के उत्पादन में गिरावट

ई़टी के मुताबिक 92 साल पुराने दार्जिलिंग के नाथमुल्स टी के सह-मालिक गिरीश सारदा ने कहा कि चाय बागानों ने पहली फ्लश चाय में 40 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की है, जो दार्जिलिंग चाय इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा राजस्व पैदा करने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि जो चाय पिछले साल 1700 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब 1900 रुपए से 2,000 रुपए प्रति किलो बिक रही है। नाथमुल्स कुछ उच्च गुणवत्ता वाली फर्स्ट फ्लश चाय बेचती है, जिसकी कीमत गुणवत्ता के आधार पर 3944 रुपए प्रति किलोग्राम से 53586 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच होती है। सारदा ने कहा कि ये चाय हाई क्लास के उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाती है और ये बहुत कम मात्रा में होती हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहकों का बड़ा वर्ग 1,500 रुपए से 2,000 रुपए प्रति किलोग्राम की रेंज में चाय खरीदता है।

सूखे की वजह से प्रभवित हुई फसल

गिरीश सारदा ने कहा कि हालांकि नवंबर में शुरू हुए लंबे सूखे की वजह से अच्छी फर्स्ट फ्लश चाय की मात्रा प्रभावित हुई है। दार्जिलिंग चाय पिछले कुछ समय से प्रकृति के प्रकोप का सामना कर रही है। 2022 में दार्जिलिंग चाय का उत्पादन 6.93 मिलियन किलोग्राम था। 2023 में यह घटकर 6.18 मिलियन किलोग्राम रह गया।

विदेशी खरीदार भी गायब

चाय इंडस्ट्री के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि 2017 में पहाड़ियों में हिंसक आंदोलन और मौजूदा चुनावों से पहले गोरखालैंड की डिमांड में पुनरुत्थान ने भी बागानों और उनकी लाभप्रदता को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है, जबकि देश के भीतर डिमांड बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा इस साल विदेशी खरीदार गायब हैं क्योंकि वे दार्जिलिंग के बजाय नेपाल की चाय को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि नेपाल की चाय काफी सस्ता है और इसका स्वाद करीब दार्जिलिंग चाय जैसा ही है।

डिमांड में यू्क्रेन-रूस युद्ध का भी असर

ईटी के मुताबिक भारतीय चाय निर्यातक संघ के अध्यक्ष अंशुमन कनोरिया ने कहा कि जैसा कि बांझी (चाय की झाड़ियों में कली की निष्क्रियता) शुरू हो गई है, फसल की संभावनाएं अच्छी नहीं दिख रही हैं और अप्रैल की फसल 25 प्रतिशत से 35 प्रतिशत पीछे रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि कमी के बावजूद डिमांड नरम बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण यूक्रेन युद्ध और कुछ आयातक देशों की कमजोर करेंसी है। कनोरिया ने कहा कि फसल की कमी, बढ़ती लागत और नरम डिमांड के साथ पहले से ही संघर्ष कर रहे दार्जिलिंग चाय बागानों पर अस्तित्व की चुनौती और बढ़ गई है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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