देश की आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने और औद्योगिक उत्पादन में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर नए आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य उन उद्योगों को राहत पहुंचाना है, जो ईंधन की कमी के कारण अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे थे। सरकार के इस कदम से न केवल उत्पादन में तेजी आएगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
एलपीजी आवंटन में 20% की बड़ी वृद्धि
अब तक उद्योगों को संकट-पूर्व स्तर का केवल 50% एलपीजी (LPG) आवंटन मिल रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। यानी कुल उपलब्धता में सीधे 20% की बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि उन फैक्ट्रियों और कारखानों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी, जहाँ ईंधन की कमी के कारण उत्पादन पर भारी दबाव पड़ रहा था। मंत्रालय का मानना है कि इस अतिरिक्त सप्लाई से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कार्यक्षमता में सुधार होगा और बाजार में उत्पादों की आपूर्ति सुचारू रूप से बनी रहेगी।
इन उद्योगों को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी आवंटन में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। इसमें स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल और प्लास्टिक जैसे श्रम-प्रधान (Labour-intensive) उद्योगों को विशेष वरीयता मिलेगी। इसके अलावा, जिन उद्योगों में एलपीजी का उपयोग अनिवार्य है और जहाँ प्राकृतिक गैस (Natural Gas) को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, उन्हें विशेष छूट देने का भी प्रावधान रखा गया है। इससे तकनीकी रूप से निर्भर उद्योगों का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रह सकेगा।
सुधारों के लिए 10% का विशेष आरक्षित कोटा
इस नए फैसले में ऊर्जा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों को भी प्रोत्साहन दिया गया है। कुल 70% कोटे में से 10% हिस्सा उन राज्यों के लिए आरक्षित रखा गया है, जो अपने यहाँ पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत सुधार लागू करेंगे। सरकार का उद्देश्य उद्योगों को धीरे-धीरे स्वच्छ ईंधन की ओर मोड़ना है। जिन राज्यों ने अभी तक इस सुधार-आधारित अतिरिक्त कोटे का लाभ नहीं लिया है, मंत्रालय ने उनसे इसे जल्द से जल्द लागू करने की अपील की है ताकि वहां के उद्योगों को अधिक लाभ मिल सके।
राज्यों को सख्त निर्देश
मंत्रालय ने सभी राज्यों को ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइन और अन्य सुविधाएं) आदेश 2026’ को संबंधित विभागों तक पहुँचाने और उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार को पूरा भरोसा है कि इस नीतिगत बदलाव से उद्योगों को कच्चे ईंधन की उपलब्धता बेहतर होगी और देश की आर्थिक विकास दर को मजबूती मिलेगी। पाइपलाइन और अन्य सुविधाओं के विस्तार से आने वाले समय में ईंधन वितरण की लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
