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कोयला सेक्टर में क्रांति: 77 साल पुराना कानून होगा खत्म, कर्मचारियों को मिलेगी बेहतर पेंशन और सुरक्षा की गारंटी!

Coal Sector Employees New Law : कोयला मंत्रालय कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा और पेंशन लाभ सुनिश्चित करने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है। यह कानून संसद से मंजूरी मिलने के बाद 77 वर्ष पुराने ‘कोयला खदान भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1948’ की जगह लेगा। नया विधेयक आधुनिक सुधारों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

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पुराने कानून को विदा, कोयला कर्मियों के भविष्य की सुरक्षा होगी दोगुनी! (तस्वीर-istock)

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Coal Sector Employees New Law : कोयला मंत्रालय कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और पेंशन संबंधी लाभ सुनिश्चित करने के लिए एक नया कानून लाने की योजना बना रहा है। यह नया कानून 77 वर्ष पुराने ‘कोयला खदान भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1948’ की जगह लेगा।

नए विधेयक में शामिल मुख्य सुधार

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक प्रस्तावित विधेयक में औद्योगिक विवादों के समाधान, कार्य स्थितियों, सामाजिक सुरक्षा, वेतन नियमन और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में हाल ही में हुए सुधारों को शामिल किया गया है।

हितधारकों से टिप्पणियों की मांग

कोयला मंत्रालय ने ‘कोयला खदान कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान विधेयक, 2025’ के प्रारूप पर हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं ताकि कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

नया नियामक ढांचा और बोर्ड गठन

प्रस्तावित कानून में मौजूदा न्यासी मंडल की जगह कोयला खदान कर्मचारी भविष्य निधि बोर्ड के गठन का प्रावधान किया गया है, जिससे एक अधिक जवाबदेह और सुदृढ़ नियामकीय ढांचा स्थापित होगा।

क्या है पुराना कानून

‘कोयला खदान भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1948’ कोयला खदानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए भविष्य निधि योजना, पारिवारिक पेंशन योजना और जमा से जुड़ी बीमा योजना लागू करता है। यह अधिनियम संविधान लागू होने से पहले बनाया गया था और समय-समय पर संशोधित होता रहा है।

कानून की समीक्षा और सुधार की जरुरत

मंत्रालय ने कहा है कि अधिनियम की व्यापक समीक्षा और उसके प्रावधानों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि यह वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी रूप से काम कर सके। यह अधिनियम कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला खदान भविष्य निधि संगठन द्वारा प्रशासित किया जाता है।

केंद्र सरकार का दृष्टिकोण

केंद्र सरकार संविधान लागू होने से पहले बने कानूनों की प्रासंगिकता की समीक्षा कर रही है। साथ ही, समान विषय-वस्तु वाले कई केंद्रीय कानूनों को मिलाकर नए सिरे से अधिनियमित करने या निरस्त करने पर विचार किया जा रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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