सिगरेट और पान मसाला शौकीनों को झटका, कल से महंगा होगा एक कश फूंकना
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Feb 1, 2026, 01:16 PM IST
सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर एक फरवरी से लागू हो जाएगा। यह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की उच्चतम 40 प्रतिशत की दर के ऊपर लगाया जाएगा। ये उपकर और उत्पाद शुल्क इन हानिकारक वस्तुओं पर एक जुलाई 2017 से लागू 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेंगे।
cigarettes to get costlier
Cigarettes to Get Costlier: अगर आप तंबाकू उत्पादों या पान मसाला का सेवन करते हैं, तो 1 फरवरी 2026 से आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। सरकार ने इन हानिकारक उत्पादों पर टैक्स के नियमों को और सख्त कर दिया है। कल से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर (Health Cess) लागू हो जाएगा। खास बात यह है कि यह नया टैक्स जीएसटी की सबसे ऊंची दर यानी 40% के ऊपर लगाया जाएगा।
कितनी महंगी हो जाएगी?
न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक इन उत्पादों पर 28% जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर लगता था, लेकिन अब इनकी जगह नया उपकर और उत्पाद शुल्क ले लेंगे। इसके अलावा, चबाने वाले तंबाकू, खैनी, जर्दा और गुटखा के लिए MRP आधारित मूल्यांकन की नई व्यवस्था शुरू हो रही है। इसका मतलब है कि अब टैक्स का निर्धारण पैकेट पर छपी खुदरा बिक्री मूल्य (MRP) के आधार पर किया जाएगा, जिससे टैक्स चोरी रोकना आसान होगा।
सिगरेट की लंबाई के हिसाब से लगेगा टैक्स
सरकार ने सिगरेट पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में भी बदलाव किया है। अब सिगरेट की लंबाई के आधार पर ₹2.05 से लेकर ₹8.50 प्रति स्टिक तक का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क देना होगा। हालांकि, पान मसाला पर कुल टैक्स का भार (जीएसटी मिलाकर) इसके मौजूदा स्तर यानी 88% पर ही बना रहेगा, लेकिन इसे वसूलने का तरीका अब 'स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून' के तहत होगा।
मैन्युफैक्चरर्स के लिए सख्त नियम
पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के लिए अब नियम काफी कड़े कर दिए गए हैं। 1 फरवरी से सभी निर्माताओं को नया पंजीकरण (Registration) कराना होगा। साथ ही, फैक्ट्री की हर पैकिंग मशीन पर कार्यशील CCTV सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस सीसीटीवी की फुटेज को कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा ताकि अधिकारी कभी भी उसकी जांच कर सकें।
कंपनियों को अपनी मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता की सटीक जानकारी अधिकारियों को देनी होगी। हालांकि, सरकार ने एक राहत भी दी है—यदि कोई मशीन लगातार 15 दिनों तक बंद रहती है, तो निर्माता उस अवधि के लिए उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकते हैं।
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