China Strict Export Of Gallium And Germanium:चीन ने एक बार फिर दुनिया को झटका दिया है। इस बार का झटका इतना बड़ा है कि अमेरिका और यूरोप के देश हिल गए हैं। असल में चीन ने दो मेटल के निर्यात को काफी सख्त कर दिया है। इसके तहत गैलियम और जर्मेनियम को चीन से निर्यात करने के लिए निर्यातकों को लाइसेंस लेना होगा और विदेशी खरीदारों और उनके साथ हुए समझौते की डिटेल चीन की सरकार को देनी होगी। चीन के इस फैसले से दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की किल्लत हो सकती है। और अगर ऐसा होता है तो मोबाइल, कार, लैपटॉप आदि के उत्पादन सीधा असर होगा। जैसा कि पिछले कुछ समय पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सप्लाई चेन बिगड़ने से हुआ था।
टेक्नोलॉजी वार का नतीजा
असल में चीन ने वैसे तो यह कहा है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए ऐसा कदम उठा रहा है। लेकिन इसके पीछे अमेरिका-चीन की टेक्नोलॉजी वार है। चीन, अमेरिका और यूरोप के बीच छिडे़ टेक्नोलॉजी वार का नतीजा है। चीन ने अमेरिका के उस कदम के बाद यह फैसला किया है, जिसमें अमेरिका ने अक्टूबर 2022 में चीन के होने वाले सेमीकंडक्टर और उपकरणों के निर्यात में कटौती करने के लिए नए नियम लागू किए थे। इसका बदला लेने के लिए चीन ने गैलियम और जर्मेनियम के निर्यात पर प्रतिबंध का ऐलान करके किया है। गैलियम और जर्मेनियम नेचुरल रूप से नहीं मिलते। आमतौर पर ये धातुएं एल्यूमीनियम और जिंक जैसी धातुओं को बनाते के दौरान मिलती हैं। गैलियम और जर्मेनियम का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, कम्यूनिकेशन और डिफेंस उपकरणों में लगने वाले चिप्स को बनाने में प्रमुख रूप से किया जाता है।
भारत में पूरी तरह से आयात पर निर्भर
भारत गैलियम और जर्मेनियम के यूज के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। इसकी वजह से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड, एलईडी डिवाइसेज, विशेष तरह के थर्मामीटर और बैरोमीटर सेंसर से लेकर ऑप्टिकल फाइबर, सोलर सेल आदि के उत्पादन पर असर होगा। ऐसे में भारत के मेक इन इंडिया अभियान पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि भारत सरकार ने दावा किया है कि चीन के इस कदम से भारत पर असर नहीं होगा।
