कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रांसफर की प्रक्रिया को बेहद आसान और ऑटोमैटिक (स्वचालित) कर दिया है। अब जिन कर्मचारियों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) उनके आधार (Aadhaar) से लिंक है और जिनका KYC पूरा है, उनका पीएफ बैलेंस नौकरी बदलते ही खुद-ब-खुद ट्रांसफर हो जाएगा। इस नई व्यवस्था के आने से कर्मचारियों को अब नौकरी बदलने के बाद पीएफ ट्रांसफर के लिए अलग से चक्कर नहीं काटने होंगे। पहले इसके लिए पिछले नियोक्ता (कंपनी), नए नियोक्ता और ईपीएफओ ऑफिस की मंजूरी की जरूरत होती थी, जिसमें काफी कागजी कार्रवाई और समय लगता था। लेकिन, इस बड़े बदलाव के बीच एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या इस नए नियम का फायदा उन लोगों को भी मिलेगा जिन्होंने महीनों या सालों पहले नौकरी बदली थी, लेकिन अपना पुराना पीएफ बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर नहीं कर पाए थे? इस विषय पर अभी तक ईपीएफओ की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
ऑटोमैटिक पीएफ ट्रांसफर का फायदा किसे और कैसे मिलेगा?
इस नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को नौकरी बदलने पर अलग से कोई ट्रांसफर रिक्वेस्ट डालने की जरूरत नहीं होगी। चूंकि अब यूएएन (UAN) को आधार से जोड़ना अनिवार्य हो चुका है, इसलिए यह पूरी प्रक्रिया सिस्टम द्वारा खुद ही पूरी (automatic PF transfer) कर ली जाएगी। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि नए दफ्तर में जॉइन करते ही तुरंत पीएफ ट्रांसफर नहीं होता है। ईपीएफओ के नए नियम के अनुसार, ऑटोमैटिक ट्रांसफर की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब आपका नया नियोक्ता (कंपनी) आपके नए पीएफ खाते में पहले महीने का योगदान (PF Contribution) जमा कर देता है। पहली किस्त जमा होते ही सिस्टम पुराने खाते के ट्रांसफर की प्रक्रिया को शुरू कर देता है।
क्या पुराने मामलों में भी काम करेगा यह सिस्टम?
पुराने अन-ट्रांसफर्ड पीएफ बैलेंस को लेकर कानून और टैक्स एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है।
- सकारात्मक दृष्टिकोण:- कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नियम पुराने और भविष्य के सभी मामलों पर लागू होगा। उनके अनुसार, ईपीएफओ का सिस्टम सदस्य के यूएएन (UAN) को स्कैन करेगा और अगर उसमें कोई पुराने अन-मर्ज्ड पीएफ मेंबर आईडी मिलते हैं, तो वह पात्रता नियमों के आधार पर खुद ही उन्हें ट्रांसफर कर देगा। हालांकि, जिन मामलों में पहले से ही नए नियोक्ता द्वारा पीएफ जमा किया जा रहा है, वहां शायद यह काम न करे और कर्मचारियों को खुद ही मैनुअल ट्रांसफर करना पड़े।
- सावधानी बरतने की सलाह:- वहीं अन्य एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईपीएफओ ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वह पुराने खातों के बैलेंस को एक साथ ट्रांसफर करने (वन-टाइम माइग्रेशन या बैक-स्वीप) के लिए कोई अभियान चलाएगा या नहीं। इसलिए, जिन लोगों ने साल-दो साल पहले नौकरी बदली थी और उनका पुराना बैलेंस अभी भी अलग दिख रहा है, उन्हें सिर्फ ऑटोमैटिक सिस्टम के भरोसे नहीं बैठना चाहिए।
ऑटोमैटिक ट्रांसफर काम न करे, तो कर्मचारी क्या करें?
अगर आपका पीएफ ऑटोमैटिक ट्रांसफर नहीं होता है, तो घबराने की जरुरत नहीं है। ईपीएफओ ने कर्मचारियों के लिए मैनुअल ट्रांसफर (मैन्युअल तरीका) का विकल्प खुला रखा है। आप ईपीएफओ मेंबर पोर्टल पर लॉगिन करके नीचे दिए गए दो तरीकों से ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। 'रिक्वेस्ट फॉर ट्रांसफर ऑफ अकाउंट' सेक्शन: आप पोर्टल पर 'Online Services' टैब के अंदर जाकर आसानी से ऑनलाइन पीएफ ट्रांसफर की रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं।
'मेंबर सर्विस हिस्ट्री' सेक्शन:- ईपीएफओ के नए 3.0 वर्जन के तहत आप "Member Service History" टैब में अपनी पिछली नौकरियों का डिटेल देख सकते हैं। अगर वहां कोई पेंडिंग ट्रांसफर क्लेम नहीं दिख रहा है, तो आप वहीं दिए गए लिंक से 'फॉर्म 13' के जरिए सीधे "सर्विस ट्रांसफर क्लेम" जेनरेट कर सकते हैं।
ईपीएफओ ने अपने डेटाबेस को मजबूत करने और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने के बाद इस ऑटोमैटिक ट्रांसफर सिस्टम को लागू किया है। अपग्रेडेशन के कारण फिलहाल पीएफ दावों और अन्य सेवाओं में थोड़ी देरी देखी जा रही है। ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह है कि कर्मचारी अपने पीएफ पासबुक पर नजर रखें। अगर दोनों मेंबर आईडी एक ही यूएएन से जुड़े होने के बावजूद पुराना पैसा ट्रांसफर नहीं होता है, तो उन्हें तुरंत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए मैनुअल ट्रांसफर रिक्वेस्ट डाल देनी चाहिए या ईपीएफओ शिकायत पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
