Housing Price In India: भारत में लोगों को महंगाई से राहत नहीं मिलती दिख रही है। दरअसल एक नए पोल के अनुसार भारत में घरों की औसत कीमत और किराए के इस साल महंगाई से अधिक होने की संभावना। सर्वे में शामिल एक्सपर्ट इस बात पर बंटे हुए हैं कि पहली बार घर खरीदने वालों के लिए अफोर्डेबिलिटी में गिरावट आएगी या सुधार होगा। इकोनॉमिक ग्रोथ में सुस्ती, स्थिर वेतन और अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियों की कमी ने लाखों कामकाजी वर्ग के परिवारों की बचत को खत्म कर दिया है, जबकि दूसरी तरफ पिछले दशक में घरों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। ऐसा इसलिए हाउसिंग मार्केट में हाई इनकम वाले लोगों का वर्चस्व है और वही इस मार्केट को चलाते हैं।
ये भी पढ़ें -
लोग किराए पर रहने को मजबूर
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार रॉयटर्स के पोल में बताया गया है कि इस साल घर और उनका किराया महंगा होगा। वहीं मजबूत मांग और सीमित सप्लाई के बीच असंतुलन ने घरों की कीमतों को इस हद तक बढ़ा दिया है कि लाखों लोगों को किराए पर रहना पड़ रहा है।
कीमतों में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार 14 प्रॉपर्टी मार्केट एक्सपर्ट्स के 17 फरवरी से 4 मार्च तक किए गए पोल में औसत पूर्वानुमान के अनुसार, भारत में घरों की औसत कीमतें इस साल 6.5% और अगले साल 6.0% बढ़ेंगी, जबकि पिछले साल इनमें लगभग 4.0% की वृद्धि हुई थी।
एक्सपर्ट्स का ये नजरिया पिछले साल दिसंबर में हुए सर्वे से थोड़ा ही बदला है, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती शुरू करने से पहले लिया गया था।
कितना बढ़ेगा किराया
पोल के मुताबिक शहरी किराया और भी तेजी से बढ़ने वाला है, जो आने वाले साल में 7.0%-10.0% तक बढ़ जाएगा। इस तरह की वृद्धि कंज्यूमर महंगाई से कहीं ज्यादा होगी, जो कि अगले दो वित्तीय वर्षों में औसतन 4.3% और 4.4% रहने की उम्मीद है (रॉयटर्स के एक अलग सर्वे के अनुसार)।
