प्रारंभिक बजट सर्वेक्षण में सामने आया है कि व्यक्तिगत करदाता आगामी बजट 2025-26 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अपने कर बोझ को कम करने के लिए राहत की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य आयकर दरों में कमी लाना और आयकर छूट की सीमा बढ़ाना है, ताकि उनकी डिस्पोजेबल आय में वृद्धि हो सके।
57 प्रतिशत ने आयकर दरों में कटौती की मांग की
सर्वेक्षण में यह पाया गया कि 57 प्रतिशत उत्तरदाता चाहते हैं कि आयकर दरों में कमी की जाए, जबकि 25 प्रतिशत लोगों का कहना है कि छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। यह सर्वेक्षण कंसल्टिंग और सर्विसेज फर्म ग्रांट थॉर्नटन भारत द्वारा किया गया था।
नया कर regime पसंद, लेकिन सुधार की आवश्यकता
वर्तमान में 72 प्रतिशत करदाता नए साधारण कर व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट कर regime) को अपना चुके हैं, जबकि केवल 28 प्रतिशत पुराने कर व्यवस्था पर बने हुए हैं। हालांकि, नया कर regime और भी आकर्षक बनाने के लिए 46 प्रतिशत करदाता आयकर दरों में कटौती और 26 प्रतिशत लोग छूट सीमा में वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
विदेशी बैंक और पेंशन स्कीम में सुधार की मांग
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि 38 प्रतिशत करदाता चाहते हैं कि वे विदेशी बैंकों के माध्यम से कर भुगतान कर सकें, खासकर एनआरआई (Non-Resident Indians) के लिए। इसके अलावा, 56 प्रतिशत करदाता चाहते हैं कि आयकर दाखिल करने के लिए आय सीमा को बढ़ाया जाए, ताकि छोटे करदाताओं पर कर filing का बोझ कम किया जा सके।
राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) में सुधार की जरूरत
सर्वेक्षण के अनुसार, 53 प्रतिशत करदाता राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) में लचीलापन चाहते हैं, विशेष रूप से प्रीमैच्योर निकासी और एन्यूटी पाउट्स के मामले में। इससे NPS को और आकर्षक बनाया जा सकता है और अधिक लोग इस योजना में भाग ले सकते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए कर प्रोत्साहन की वापसी की अपील
इसके अलावा, करदाता चाहते हैं कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को प्रोत्साहित करने के लिए कर प्रोत्साहन वापस लाए, जैसा कि पहले 2019-2023 के बीच ईवी लोन पर ब्याज पर छूट दी गई थी।
