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Budget 2026: क्या इस बार बजट में डिफेंस सेक्टर को मिलेगा 'आत्मनिर्भरता का बूस्ट', ये बड़े ऐलान संभव

Budget 2026: क्या इस बार डिफेंस सेक्टर को और ज्यादा पैसा मिलेगा? पिछले बजट (2025) में सरकार ने रक्षा के लिए ₹6.81 लाख करोड़ आवंटित किए थे, जो पहले के मुकाबले 9.5% ज्यादा था। अब 2026 के बजट में सेनाओं की नई जरूरतों को देखते हुए आवंटन बढ़ने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।

Defence Budget

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Budget 2026: भारत को एक वैश्विक महाशक्ति (Global Superpower) बनाने की दिशा में रक्षा क्षेत्र यानी डिफेंस सेक्टर सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026 से पहले बाजार और रक्षा विशेषज्ञों के बीच जबरदस्त हलचल है। पिछले साल यानी 2025 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन 9.5% बढ़ाकर ₹6.81 लाख करोड़ किया गया था। इस बार भी उम्मीद है कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को ध्यान में रखते हुए सरकार रक्षा बजट की तिजोरी को और बड़ा कर सकती है।

बजट आवंटन में कितनी होगी बढ़ोतरी?

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस बार बजट में 7% से 12% की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों, जैसे पूर्व रक्षा सचिव गिरधर अरमाने का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और पुराने ऑर्डर्स के पेमेंट को देखते हुए यह बढ़ोतरी 20-25% तक भी जा सकती है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले पांच वर्षों में रक्षा खर्च सालाना करीब 9.2% की दर से बढ़ा है, जो दिखाता है कि सरकार सेनाओं के आधुनिकीकरण को लेकर कितनी गंभीर है।

ड्रोन युद्ध और नई टेक्नोलॉजी पर रहेगा जोर

हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' और सीमाओं पर बढ़ते तनाव ने युद्ध के एक नए तरीके की ओर इशारा किया है ड्रोन वॉरफेयर। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सीमावर्ती इलाकों और समुद्री तटों पर 'काउंटर-ड्रोन इकोसिस्टम' (ड्रोन हमलों से निपटने वाली तकनीक) के विस्तार पर बड़ा निवेश करना चाहिए। दक्षिण एशिया में बढ़ते इस नए खतरे को देखते हुए बजट में ड्रोन्स और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए अलग से फंड की घोषणा संभव है।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) है असली कुंजी

भारत की असली ताकत तब बढ़ेगी जब तकनीक भी हमारी अपनी होगी। पिछले साल R&D और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹31,277 करोड़ दिए गए थे। इस बार मांग है कि रिसर्च पर खर्च और बढ़ाया जाए ताकि भविष्य में किसी भी विदेशी पार्टनरशिप पर भारत की निर्भरता कम हो सके। स्वदेशीकरण को तेज करने के लिए सरकार निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को और अधिक रियायतें दे सकती है।

स्वदेशी उत्पादन और निर्यात के बड़े लक्ष्य

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक लंबी छलांग लगाई है। कभी हम 70% हथियार आयात करते थे, लेकिन आज 65% रक्षा उपकरण देश में ही बन रहे हैं। वित्त वर्ष 2025 में रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.51 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जिसे सरकार 2029 तक ₹3 लाख करोड़ पर ले जाना चाहती है। इतना ही नहीं, भारत अब केवल हथियार खरीद नहीं रहा बल्कि बेच भी रहा है। रक्षा निर्यात (Defence Export) ₹23,622 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर है, जिसे 2029 तक ₹50,000 करोड़ करने का लक्ष्य है।

एक चिंता की बात यह भी है कि रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन में चला जाता है। इसके अलावा, डिफेंस मिनिस्ट्री का कुछ फंड हर साल खर्च न हो पाने के कारण वापस चला जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जो भी पैसा मिले, उसके 'बेहतर इस्तेमाल' पर जोर होना चाहिए। साथ ही, केवल GDP के प्रतिशत के रूप में रक्षा खर्च को देखना सही नहीं है; इसे पूरे सरकारी बजट के हिस्से के रूप में देखना चाहिए क्योंकि आयात पर किया गया खर्च देश की दीर्घकालिक क्षमताओं को नहीं बढ़ाता।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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