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Budget 2026: ब्लैक बजट से लेकर ड्रीम बजट तक, भारत के वो 5 बजट जिन्होंने बदल दी इकोनॉमी की चाल

Budget 2026: 2026 के इस आगामी बजट की चर्चा के बीच, भारत के बजटीय इतिहास के पन्नों को पलटें तो हमें 5 ऐसे खास बजट मिलते हैं जिन्होंने न केवल सुर्खियां बटोरीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की चाल दी है। आइए जानते हैं इन 5 चर्चित बजटों की दिलचस्प कहानी।

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Budget 2026 History

Budget 2026: साल 2026 के सबसे बड़े इकोनॉमिक इवेंट यानी आम बजट 2026 को पेश होने में अब महज कुछ ही घंटों का समय बचा है। 1 फरवरी की सुबह जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना बजट ब्रीफकेस यानि डिजिटल टैब लेकर संसद की सीढ़ियां चढ़ेंगी, पूरे देश की नजरें उनकी घोषणाओं पर टिक जाएंगी। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही हैं, और भारत अपनी विकास दर को नई रफ्तार देने की कोशिश कर रहा है।

2026 के इस आगामी बजट की चर्चा के बीच, भारत के बजटीय इतिहास के पन्नों को पलटें तो हमें 5 ऐसे खास बजट मिलते हैं जिन्होंने न केवल सुर्खियां बटोरीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की चाल दी है। आइए जानते हैं इन 5 चर्चित बजटों की दिलचस्प कहानी।

Black Budget

भारत के इतिहास में सबसे पहला चर्चित बजट 'ब्लैक बजट' के नाम से जाना जाता है, जिसे साल 1973 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव बी. चव्हाण ने पेश किया था। इसे 'काला बजट' इसलिए कहा गया क्योंकि उस समय भारत की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी। देश 550 करोड़ रुपये के भारी राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) से जूझ रहा था। इंदिरा गांधी की सरकार के इस कार्यकाल के दौरान ही कोयले की खदानों के राष्ट्रीयकरण का बड़ा फैसला लिया गया था। खजाना खाली होने और आर्थिक तंगी के कारण इस बजट को इतिहास के सबसे कठिन दौर का प्रतीक माना जाता है।

Liberalised Budget

इसके बाद आता है साल 1991 का ऐतिहासिक बजट, जिसे 'उदारीकरण बजट' (Liberalised Budget) कहा जाता है। डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा पेश किए गए इस बजट ने डूबती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन दिया था। यह वह समय था जब भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका था। इस बजट के जरिए भारत ने 'लाइसेंस राज' को खत्म कर अपनी अर्थव्यवस्था के दरवाजे पूरी दुनिया के लिए खोल दिए। विदेशी कंपनियों का भारत आना और भारतीय कंपनियों का वैश्विक स्तर पर जाना इसी बजट की देन है। इसे आधुनिक भारत की आर्थिक आजादी का घोषणापत्र भी माना जाता है।

Dream Budget

साल 1997 के बजट ने मध्यम वर्ग और कंपनियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी, जिसके कारण इसे 'ड्रीम बजट' का नाम दिया गया। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इस बजट में इनकम टैक्स की दरों में इतनी भारी कटौती की थी कि लोगों को यकीन ही नहीं हुआ। साथ ही, कॉरपोरेट टैक्स और सरचार्ज को भी कम किया गया। सरकार का तर्क था कि टैक्स कम होने से लोग ईमानदारी से टैक्स भरेंगे और उनके हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा। मिडिल क्लास के लिए यह बजट वाकई किसी सपने के सच होने जैसा था।

Millenium Budget

नई सदी के स्वागत में साल 2000 में पेश किया गया 'मिलेनियम बजट' भारत के तकनीकी विकास के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस बजट में भारत को 'आईटी सुपरपावर' बनाने की नींव रखी थी। कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और सीडी जैसी चीजों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को काफी कम कर दिया गया। इसी दूरगामी सोच का परिणाम है कि आजभारत सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। इसने युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा किए।

Rollback Budget

अंत में जिक्र आता है साल 2002 के 'रोलबैक बजट' का। इसे भी यशवंत सिन्हा ने ही पेश किया था, लेकिन यह बजट सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया था। इस बजट में रसोई गैस (LPG) की कीमतों और सर्विस टैक्स में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। पूरे देश में इस कदर विरोध हुआ कि सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और बढ़े हुए दामों को वापस (Rollback) लेना पड़ा। चूंकि सरकार को अपने कई बड़े फैसले वापस लेने पड़े, इसलिए इतिहास में इसका नाम ही 'रोलबैक बजट' पड़ गया।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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